पंचांग 7 दिसंबर 2060

तिथि और स्थान चुनें — सूर्योदय से अगले सूर्योदय तक तिथि, नक्षत्र, योग, करण, राहु काल और चौघड़िया। गणना आपके फ़ोन पर ही होती है।

स्थान
तिथि (तारीख)

7 दिसंबर 2060 · मंगलवार

पुणे — Pune, Maharashtra · समय इस स्थान के समय-क्षेत्र में (Asia/Kolkata)

इस महीने का पंचांग (कैलेंडर)
सूर्योदय06:54
सूर्यास्त17:57
चंद्रोदय17:40
चंद्रास्तनहीं
मास:
मार्गशीर्ष (अमांत)
संवत:
शक 1982 · विक्रम (चैत्रादि) 2117
संवत्सर:
विक्रम (शक-आधारित, महाराष्ट्र/दक्षिण परंपरा)
ऋतु · अयन:
हेमंत · दक्षिणायन
सूर्य राशि:
वृश्चिक
चंद्र राशि:
वृषभ

पंचांग के अंग — सूर्योदय से अगले सूर्योदय तक

वार
मंगलवार
तिथि
शुक्ल पूर्णिमा 20:18 तक, फिर कृष्ण प्रतिपदा 17:00 (8 दिस॰) तक
नक्षत्र
रोहिणी 23:08 तक, फिर मृगशीर्ष 20:37 (8 दिस॰) तक
योग
सिद्ध 15:38 तक, फिर साध्य 11:40 (8 दिस॰) तक
करण
विष्टि 10:01 तक, फिर बव 20:18 तक, फिर बालव 06:37 (8 दिस॰) तक, फिर कौलव 17:00 (8 दिस॰) तक

मुहूर्त-काल

  • अभिजित मुहूर्त12:04 – 12:48
  • राहु काल15:12 – 16:34
  • यमगंड09:40 – 11:03
  • गुलिक काल12:26 – 13:49

राहु काल, यमगंड और गुलिक परंपरा में नए शुभ कार्य के आरंभ के लिए टाले जाने वाले काल हैं — रोज़ के काम के लिए डरने का कारण नहीं।

चौघड़िया

दिन

  • रोग(वर्जित (परंपरा))06:54 – 08:17
  • उद्वेग(वर्जित (परंपरा))08:17 – 09:40
  • चर(सामान्य)09:40 – 11:03
  • लाभ(शुभ)11:03 – 12:26
  • अमृत(शुभ)12:26 – 13:49
  • काल(वर्जित (परंपरा))13:49 – 15:12
  • शुभ(शुभ)15:12 – 16:34
  • रोग(वर्जित (परंपरा))16:34 – 17:57

रात

  • काल(वर्जित (परंपरा))17:57 – 19:35
  • लाभ(शुभ)19:35 – 21:12
  • उद्वेग(वर्जित (परंपरा))21:12 – 22:49
  • शुभ(शुभ)22:49 – 00:26 (8 दिस॰)
  • अमृत(शुभ)00:26 (8 दिस॰) – 02:03 (8 दिस॰)
  • चर(सामान्य)02:03 (8 दिस॰) – 03:40 (8 दिस॰)
  • रोग(वर्जित (परंपरा))03:40 (8 दिस॰) – 05:17 (8 दिस॰)
  • काल(वर्जित (परंपरा))05:17 (8 दिस॰) – 06:54 (8 दिस॰)

पुस्तक: पंचांग स्थान, सूर्योदय, समय-क्षेत्र और अयनांश पर निर्भर है — संस्कार, पर्व या मुहूर्त के लिए प्रकाशित स्थानीय पंचांग से समय सत्यापित करें।

निरयन लाहिड़ी अयनांश; सूर्योदय-सूर्यास्त सूर्य-बिंब के ऊपरी किनारे से, वायुमंडलीय अपवर्तन सहित। प्रकाशित पंचांगों से 1–2 मिनट का अंतर संभव।

पुस्तक में:अध्याय 3 · जन्म-विवरण से कुंडली कैसे बनती है · पृष्ठ 22

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