पंचांग 2 जनवरी 2061

तिथि और स्थान चुनें — सूर्योदय से अगले सूर्योदय तक तिथि, नक्षत्र, योग, करण, राहु काल और चौघड़िया। गणना आपके फ़ोन पर ही होती है।

स्थान
तिथि (तारीख)

2 जनवरी 2061 · रविवार

पुणे — Pune, Maharashtra · समय इस स्थान के समय-क्षेत्र में (Asia/Kolkata)

इस महीने का पंचांग (कैलेंडर)
सूर्योदय07:07
सूर्यास्त18:10
चंद्रोदय14:31
चंद्रास्त04:02 (3 जन॰)
मास:
पौष (अमांत)
संवत:
शक 1982 · विक्रम (चैत्रादि) 2117
संवत्सर:
विक्रम (शक-आधारित, महाराष्ट्र/दक्षिण परंपरा)
ऋतु · अयन:
हेमंत · दक्षिणायन
सूर्य राशि:
धनु
चंद्र राशि:
मेष 19:15 तक, फिर वृषभ

पंचांग के अंग — सूर्योदय से अगले सूर्योदय तक

वार
रविवार
तिथि
शुक्ल एकादशी 19:13 तक, फिर शुक्ल द्वादशी 16:23 (3 जन॰) तक
नक्षत्र
भरणी 13:45 तक, फिर कृत्तिका 11:40 (3 जन॰) तक
योग
साध्य 03:29 (3 जन॰) तक, फिर शुभ 23:54 (3 जन॰) तक
करण
वणिज 08:33 तक, फिर विष्टि 19:13 तक, फिर बव 05:49 (3 जन॰) तक, फिर बालव 16:23 (3 जन॰) तक

मुहूर्त-काल

  • अभिजित मुहूर्त12:16 – 13:00
  • राहु काल16:47 – 18:10
  • यमगंड12:38 – 14:01
  • गुलिक काल15:24 – 16:47

राहु काल, यमगंड और गुलिक परंपरा में नए शुभ कार्य के आरंभ के लिए टाले जाने वाले काल हैं — रोज़ के काम के लिए डरने का कारण नहीं।

चौघड़िया

दिन

  • उद्वेग(वर्जित (परंपरा))07:07 – 08:30
  • चर(सामान्य)08:30 – 09:52
  • लाभ(शुभ)09:52 – 11:15
  • अमृत(शुभ)11:15 – 12:38
  • काल(वर्जित (परंपरा))12:38 – 14:01
  • शुभ(शुभ)14:01 – 15:24
  • रोग(वर्जित (परंपरा))15:24 – 16:47
  • उद्वेग(वर्जित (परंपरा))16:47 – 18:10

रात

  • शुभ(शुभ)18:10 – 19:47
  • अमृत(शुभ)19:47 – 21:24
  • चर(सामान्य)21:24 – 23:01
  • रोग(वर्जित (परंपरा))23:01 – 00:38 (3 जन॰)
  • काल(वर्जित (परंपरा))00:38 (3 जन॰) – 02:16 (3 जन॰)
  • लाभ(शुभ)02:16 (3 जन॰) – 03:53 (3 जन॰)
  • उद्वेग(वर्जित (परंपरा))03:53 (3 जन॰) – 05:30 (3 जन॰)
  • शुभ(शुभ)05:30 (3 जन॰) – 07:07 (3 जन॰)

पुस्तक: पंचांग स्थान, सूर्योदय, समय-क्षेत्र और अयनांश पर निर्भर है — संस्कार, पर्व या मुहूर्त के लिए प्रकाशित स्थानीय पंचांग से समय सत्यापित करें।

निरयन लाहिड़ी अयनांश; सूर्योदय-सूर्यास्त सूर्य-बिंब के ऊपरी किनारे से, वायुमंडलीय अपवर्तन सहित। प्रकाशित पंचांगों से 1–2 मिनट का अंतर संभव।

पुस्तक में:अध्याय 3 · जन्म-विवरण से कुंडली कैसे बनती है · पृष्ठ 22

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