पंचांग 5 फ़रवरी 2061

तिथि और स्थान चुनें — सूर्योदय से अगले सूर्योदय तक तिथि, नक्षत्र, योग, करण, राहु काल और चौघड़िया। गणना आपके फ़ोन पर ही होती है।

स्थान
तिथि (तारीख)

5 फ़रवरी 2061 · शनिवार

पुणे — Pune, Maharashtra · समय इस स्थान के समय-क्षेत्र में (Asia/Kolkata)

इस महीने का पंचांग (कैलेंडर)
सूर्योदय07:06
सूर्यास्त18:30
चंद्रोदय19:18
चंद्रास्त07:41
मास:
माघ (अमांत) · फाल्गुन (पूर्णिमांत)
संवत:
शक 1982 · विक्रम (चैत्रादि) 2117
संवत्सर:
विक्रम (शक-आधारित, महाराष्ट्र/दक्षिण परंपरा)
ऋतु · अयन:
शिशिर · उत्तरायण
सूर्य राशि:
मकर
चंद्र राशि:
कर्क 11:44 तक, फिर सिंह

पंचांग के अंग — सूर्योदय से अगले सूर्योदय तक

वार
शनिवार
तिथि
कृष्ण प्रतिपदा 19:59 तक, फिर कृष्ण द्वितीया 19:43 (6 फ़र॰) तक
नक्षत्र
आश्लेषा 11:44 तक, फिर मघा 11:52 (6 फ़र॰) तक
योग
सौभाग्य 13:32 तक, फिर शोभन 11:58 (6 फ़र॰) तक
करण
बालव 08:21 तक, फिर कौलव 19:59 तक, फिर तैतिल 07:46 (6 फ़र॰) तक

मुहूर्त-काल

  • अभिजित मुहूर्त12:25 – 13:11
  • राहु काल09:57 – 11:23
  • यमगंड14:14 – 15:39
  • गुलिक काल07:06 – 08:32

राहु काल, यमगंड और गुलिक परंपरा में नए शुभ कार्य के आरंभ के लिए टाले जाने वाले काल हैं — रोज़ के काम के लिए डरने का कारण नहीं।

चौघड़िया

दिन

  • काल(वर्जित (परंपरा))07:06 – 08:32
  • शुभ(शुभ)08:32 – 09:57
  • रोग(वर्जित (परंपरा))09:57 – 11:23
  • उद्वेग(वर्जित (परंपरा))11:23 – 12:48
  • चर(सामान्य)12:48 – 14:14
  • लाभ(शुभ)14:14 – 15:39
  • अमृत(शुभ)15:39 – 17:05
  • काल(वर्जित (परंपरा))17:05 – 18:30

रात

  • लाभ(शुभ)18:30 – 20:05
  • उद्वेग(वर्जित (परंपरा))20:05 – 21:39
  • शुभ(शुभ)21:39 – 23:13
  • अमृत(शुभ)23:13 – 00:48 (6 फ़र॰)
  • चर(सामान्य)00:48 (6 फ़र॰) – 02:22 (6 फ़र॰)
  • रोग(वर्जित (परंपरा))02:22 (6 फ़र॰) – 03:57 (6 फ़र॰)
  • काल(वर्जित (परंपरा))03:57 (6 फ़र॰) – 05:31 (6 फ़र॰)
  • लाभ(शुभ)05:31 (6 फ़र॰) – 07:06 (6 फ़र॰)

पुस्तक: पंचांग स्थान, सूर्योदय, समय-क्षेत्र और अयनांश पर निर्भर है — संस्कार, पर्व या मुहूर्त के लिए प्रकाशित स्थानीय पंचांग से समय सत्यापित करें।

निरयन लाहिड़ी अयनांश; सूर्योदय-सूर्यास्त सूर्य-बिंब के ऊपरी किनारे से, वायुमंडलीय अपवर्तन सहित। प्रकाशित पंचांगों से 1–2 मिनट का अंतर संभव।

पुस्तक में:अध्याय 3 · जन्म-विवरण से कुंडली कैसे बनती है · पृष्ठ 22

अपनी कुंडली देखें