पंचांग 17 मार्च 2061

तिथि और स्थान चुनें — सूर्योदय से अगले सूर्योदय तक तिथि, नक्षत्र, योग, करण, राहु काल और चौघड़िया। गणना आपके फ़ोन पर ही होती है।

स्थान
तिथि (तारीख)

17 मार्च 2061 · गुरुवार

पुणे — Pune, Maharashtra · समय इस स्थान के समय-क्षेत्र में (Asia/Kolkata)

इस महीने का पंचांग (कैलेंडर)
सूर्योदय06:40
सूर्यास्त18:44
चंद्रोदय04:15 (18 मार्च)
चंद्रास्त14:38
मास:
फाल्गुन (अमांत) · चैत्र (पूर्णिमांत)
संवत:
शक 1982 · विक्रम (चैत्रादि) 2117
संवत्सर:
विक्रम (शक-आधारित, महाराष्ट्र/दक्षिण परंपरा)
ऋतु · अयन:
शिशिर · उत्तरायण
सूर्य राशि:
मीन
चंद्र राशि:
मकर

पंचांग के अंग — सूर्योदय से अगले सूर्योदय तक

वार
गुरुवार
तिथि
कृष्ण एकादशी 05:25 (18 मार्च) तक, फिर कृष्ण द्वादशी 04:43 (19 मार्च) तक
नक्षत्र
उत्तराषाढ़ा 19:53 तक, फिर श्रवण 20:07 (18 मार्च) तक
योग
परिघ 20:48 तक, फिर शिव 19:20 (18 मार्च) तक
करण
बव 17:29 तक, फिर बालव 05:25 (18 मार्च) तक, फिर कौलव 17:09 (18 मार्च) तक

मुहूर्त-काल

  • अभिजित मुहूर्त12:18 – 13:07
  • राहु काल14:13 – 15:43
  • यमगंड06:40 – 08:11
  • गुलिक काल09:41 – 11:12

राहु काल, यमगंड और गुलिक परंपरा में नए शुभ कार्य के आरंभ के लिए टाले जाने वाले काल हैं — रोज़ के काम के लिए डरने का कारण नहीं।

चौघड़िया

दिन

  • शुभ(शुभ)06:40 – 08:11
  • रोग(वर्जित (परंपरा))08:11 – 09:41
  • उद्वेग(वर्जित (परंपरा))09:41 – 11:12
  • चर(सामान्य)11:12 – 12:42
  • लाभ(शुभ)12:42 – 14:13
  • अमृत(शुभ)14:13 – 15:43
  • काल(वर्जित (परंपरा))15:43 – 17:14
  • शुभ(शुभ)17:14 – 18:44

रात

  • अमृत(शुभ)18:44 – 20:14
  • चर(सामान्य)20:14 – 21:43
  • रोग(वर्जित (परंपरा))21:43 – 23:13
  • काल(वर्जित (परंपरा))23:13 – 00:42 (18 मार्च)
  • लाभ(शुभ)00:42 (18 मार्च) – 02:11 (18 मार्च)
  • उद्वेग(वर्जित (परंपरा))02:11 (18 मार्च) – 03:41 (18 मार्च)
  • शुभ(शुभ)03:41 (18 मार्च) – 05:10 (18 मार्च)
  • अमृत(शुभ)05:10 (18 मार्च) – 06:40 (18 मार्च)

पुस्तक: पंचांग स्थान, सूर्योदय, समय-क्षेत्र और अयनांश पर निर्भर है — संस्कार, पर्व या मुहूर्त के लिए प्रकाशित स्थानीय पंचांग से समय सत्यापित करें।

निरयन लाहिड़ी अयनांश; सूर्योदय-सूर्यास्त सूर्य-बिंब के ऊपरी किनारे से, वायुमंडलीय अपवर्तन सहित। प्रकाशित पंचांगों से 1–2 मिनट का अंतर संभव।

पुस्तक में:अध्याय 3 · जन्म-विवरण से कुंडली कैसे बनती है · पृष्ठ 22

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