पंचांग 25 मार्च 2061

तिथि और स्थान चुनें — सूर्योदय से अगले सूर्योदय तक तिथि, नक्षत्र, योग, करण, राहु काल और चौघड़िया। गणना आपके फ़ोन पर ही होती है।

स्थान
तिथि (तारीख)

25 मार्च 2061 · शुक्रवार

पुणे — Pune, Maharashtra · समय इस स्थान के समय-क्षेत्र में (Asia/Kolkata)

इस महीने का पंचांग (कैलेंडर)
सूर्योदय06:34
सूर्यास्त18:46
चंद्रोदय09:07
चंद्रास्त22:41
मास:
चैत्र (अमांत)
संवत:
शक 1983 · विक्रम (चैत्रादि) 2118
संवत्सर:
वृष (शक-आधारित, महाराष्ट्र/दक्षिण परंपरा)
ऋतु · अयन:
वसंत · उत्तरायण
सूर्य राशि:
मीन
चंद्र राशि:
मेष 13:50 तक, फिर वृषभ

पंचांग के अंग — सूर्योदय से अगले सूर्योदय तक

वार
शुक्रवार
तिथि
शुक्ल चतुर्थी 11:11 तक, फिर शुक्ल पंचमी 08:25 (26 मार्च) तक
नक्षत्र
भरणी 08:21 तक, फिर कृत्तिका 06:20 (26 मार्च) तक, फिर रोहिणी 04:34 (27 मार्च) तक
योग
विष्कम्भ 18:12 तक, फिर प्रीति 14:51 (26 मार्च) तक
करण
विष्टि 11:11 तक, फिर बव 21:46 तक, फिर बालव 08:25 (26 मार्च) तक

मुहूर्त-काल

  • अभिजित मुहूर्त12:16 – 13:04
  • राहु काल11:08 – 12:40
  • यमगंड15:43 – 17:15
  • गुलिक काल08:05 – 09:37

राहु काल, यमगंड और गुलिक परंपरा में नए शुभ कार्य के आरंभ के लिए टाले जाने वाले काल हैं — रोज़ के काम के लिए डरने का कारण नहीं।

चौघड़िया

दिन

  • चर(सामान्य)06:34 – 08:05
  • लाभ(शुभ)08:05 – 09:37
  • अमृत(शुभ)09:37 – 11:08
  • काल(वर्जित (परंपरा))11:08 – 12:40
  • शुभ(शुभ)12:40 – 14:12
  • रोग(वर्जित (परंपरा))14:12 – 15:43
  • उद्वेग(वर्जित (परंपरा))15:43 – 17:15
  • चर(सामान्य)17:15 – 18:46

रात

  • रोग(वर्जित (परंपरा))18:46 – 20:15
  • काल(वर्जित (परंपरा))20:15 – 21:43
  • लाभ(शुभ)21:43 – 23:11
  • उद्वेग(वर्जित (परंपरा))23:11 – 00:40 (26 मार्च)
  • शुभ(शुभ)00:40 (26 मार्च) – 02:08 (26 मार्च)
  • अमृत(शुभ)02:08 (26 मार्च) – 03:36 (26 मार्च)
  • चर(सामान्य)03:36 (26 मार्च) – 05:05 (26 मार्च)
  • रोग(वर्जित (परंपरा))05:05 (26 मार्च) – 06:33 (26 मार्च)

पुस्तक: पंचांग स्थान, सूर्योदय, समय-क्षेत्र और अयनांश पर निर्भर है — संस्कार, पर्व या मुहूर्त के लिए प्रकाशित स्थानीय पंचांग से समय सत्यापित करें।

निरयन लाहिड़ी अयनांश; सूर्योदय-सूर्यास्त सूर्य-बिंब के ऊपरी किनारे से, वायुमंडलीय अपवर्तन सहित। प्रकाशित पंचांगों से 1–2 मिनट का अंतर संभव।

पुस्तक में:अध्याय 3 · जन्म-विवरण से कुंडली कैसे बनती है · पृष्ठ 22

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