पंचांग 29 मार्च 2061

तिथि और स्थान चुनें — सूर्योदय से अगले सूर्योदय तक तिथि, नक्षत्र, योग, करण, राहु काल और चौघड़िया। गणना आपके फ़ोन पर ही होती है।

स्थान
तिथि (तारीख)

29 मार्च 2061 · मंगलवार

पुणे — Pune, Maharashtra · समय इस स्थान के समय-क्षेत्र में (Asia/Kolkata)

इस महीने का पंचांग (कैलेंडर)
सूर्योदय06:31
सूर्यास्त18:47
चंद्रोदय13:00
चंद्रास्त02:47 (30 मार्च)
मास:
चैत्र (अमांत)
संवत:
शक 1983 · विक्रम (चैत्रादि) 2118
संवत्सर:
वृष (शक-आधारित, महाराष्ट्र/दक्षिण परंपरा)
ऋतु · अयन:
वसंत · उत्तरायण
सूर्य राशि:
मीन
चंद्र राशि:
मिथुन 19:43 तक, फिर कर्क

पंचांग के अंग — सूर्योदय से अगले सूर्योदय तक

वार
मंगलवार
तिथि
शुक्ल नवमी 00:53 (30 मार्च) तक, फिर शुक्ल दशमी 00:06 (31 मार्च) तक
नक्षत्र
पुनर्वसु 01:37 (30 मार्च) तक, फिर पुष्य 01:32 (31 मार्च) तक
योग
शोभन 06:33 तक, फिर अतिगण्ड 04:29 (30 मार्च) तक, फिर सुकर्मा 02:47 (31 मार्च) तक
करण
बालव 13:27 तक, फिर कौलव 00:53 (30 मार्च) तक, फिर तैतिल 12:25 (30 मार्च) तक

मुहूर्त-काल

  • अभिजित मुहूर्त12:14 – 13:03
  • राहु काल15:43 – 17:15
  • यमगंड09:35 – 11:07
  • गुलिक काल12:39 – 14:11

राहु काल, यमगंड और गुलिक परंपरा में नए शुभ कार्य के आरंभ के लिए टाले जाने वाले काल हैं — रोज़ के काम के लिए डरने का कारण नहीं।

चौघड़िया

दिन

  • रोग(वर्जित (परंपरा))06:31 – 08:03
  • उद्वेग(वर्जित (परंपरा))08:03 – 09:35
  • चर(सामान्य)09:35 – 11:07
  • लाभ(शुभ)11:07 – 12:39
  • अमृत(शुभ)12:39 – 14:11
  • काल(वर्जित (परंपरा))14:11 – 15:43
  • शुभ(शुभ)15:43 – 17:15
  • रोग(वर्जित (परंपरा))17:15 – 18:47

रात

  • काल(वर्जित (परंपरा))18:47 – 20:15
  • लाभ(शुभ)20:15 – 21:43
  • उद्वेग(वर्जित (परंपरा))21:43 – 23:11
  • शुभ(शुभ)23:11 – 00:38 (30 मार्च)
  • अमृत(शुभ)00:38 (30 मार्च) – 02:06 (30 मार्च)
  • चर(सामान्य)02:06 (30 मार्च) – 03:34 (30 मार्च)
  • रोग(वर्जित (परंपरा))03:34 (30 मार्च) – 05:02 (30 मार्च)
  • काल(वर्जित (परंपरा))05:02 (30 मार्च) – 06:30 (30 मार्च)

पुस्तक: पंचांग स्थान, सूर्योदय, समय-क्षेत्र और अयनांश पर निर्भर है — संस्कार, पर्व या मुहूर्त के लिए प्रकाशित स्थानीय पंचांग से समय सत्यापित करें।

निरयन लाहिड़ी अयनांश; सूर्योदय-सूर्यास्त सूर्य-बिंब के ऊपरी किनारे से, वायुमंडलीय अपवर्तन सहित। प्रकाशित पंचांगों से 1–2 मिनट का अंतर संभव।

पुस्तक में:अध्याय 3 · जन्म-विवरण से कुंडली कैसे बनती है · पृष्ठ 22

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