पंचांग 21 अप्रैल 2061

तिथि और स्थान चुनें — सूर्योदय से अगले सूर्योदय तक तिथि, नक्षत्र, योग, करण, राहु काल और चौघड़िया। गणना आपके फ़ोन पर ही होती है।

स्थान
तिथि (तारीख)

21 अप्रैल 2061 · गुरुवार

पुणे — Pune, Maharashtra · समय इस स्थान के समय-क्षेत्र में (Asia/Kolkata)

इस महीने का पंचांग (कैलेंडर)
सूर्योदय06:13
सूर्यास्त18:53
चंद्रोदय06:57
चंद्रास्त20:22
मास:
वैशाख (अमांत)
संवत:
शक 1983 · विक्रम (चैत्रादि) 2118
संवत्सर:
वृष (शक-आधारित, महाराष्ट्र/दक्षिण परंपरा)
ऋतु · अयन:
वसंत · उत्तरायण
सूर्य राशि:
मेष
चंद्र राशि:
मेष 23:01 तक, फिर वृषभ

पंचांग के अंग — सूर्योदय से अगले सूर्योदय तक

वार
गुरुवार
तिथि
शुक्ल द्वितीया 01:26 (22 अप्रैल) तक, फिर शुक्ल तृतीया 21:58 (22 अप्रैल) तक
नक्षत्र
भरणी 17:43 तक, फिर कृत्तिका 14:59 (22 अप्रैल) तक
योग
प्रीति 06:57 तक, फिर आयुष्मान 02:53 (22 अप्रैल) तक, फिर सौभाग्य 22:55 (22 अप्रैल) तक
करण
बालव 15:14 तक, फिर कौलव 01:26 (22 अप्रैल) तक, फिर तैतिल 11:41 (22 अप्रैल) तक

मुहूर्त-काल

  • अभिजित मुहूर्त12:07 – 12:58
  • राहु काल14:08 – 15:43
  • यमगंड06:13 – 07:48
  • गुलिक काल09:23 – 10:58

राहु काल, यमगंड और गुलिक परंपरा में नए शुभ कार्य के आरंभ के लिए टाले जाने वाले काल हैं — रोज़ के काम के लिए डरने का कारण नहीं।

चौघड़िया

दिन

  • शुभ(शुभ)06:13 – 07:48
  • रोग(वर्जित (परंपरा))07:48 – 09:23
  • उद्वेग(वर्जित (परंपरा))09:23 – 10:58
  • चर(सामान्य)10:58 – 12:33
  • लाभ(शुभ)12:33 – 14:08
  • अमृत(शुभ)14:08 – 15:43
  • काल(वर्जित (परंपरा))15:43 – 17:18
  • शुभ(शुभ)17:18 – 18:53

रात

  • अमृत(शुभ)18:53 – 20:18
  • चर(सामान्य)20:18 – 21:43
  • रोग(वर्जित (परंपरा))21:43 – 23:08
  • काल(वर्जित (परंपरा))23:08 – 00:32 (22 अप्रैल)
  • लाभ(शुभ)00:32 (22 अप्रैल) – 01:57 (22 अप्रैल)
  • उद्वेग(वर्जित (परंपरा))01:57 (22 अप्रैल) – 03:22 (22 अप्रैल)
  • शुभ(शुभ)03:22 (22 अप्रैल) – 04:47 (22 अप्रैल)
  • अमृत(शुभ)04:47 (22 अप्रैल) – 06:12 (22 अप्रैल)

पुस्तक: पंचांग स्थान, सूर्योदय, समय-क्षेत्र और अयनांश पर निर्भर है — संस्कार, पर्व या मुहूर्त के लिए प्रकाशित स्थानीय पंचांग से समय सत्यापित करें।

निरयन लाहिड़ी अयनांश; सूर्योदय-सूर्यास्त सूर्य-बिंब के ऊपरी किनारे से, वायुमंडलीय अपवर्तन सहित। प्रकाशित पंचांगों से 1–2 मिनट का अंतर संभव।

पुस्तक में:अध्याय 3 · जन्म-विवरण से कुंडली कैसे बनती है · पृष्ठ 22

अपनी कुंडली देखें