पंचांग 16 जनवरी 2063

तिथि और स्थान चुनें — सूर्योदय से अगले सूर्योदय तक तिथि, नक्षत्र, योग, करण, राहु काल और चौघड़िया। गणना आपके फ़ोन पर ही होती है।

स्थान
तिथि (तारीख)

16 जनवरी 2063 · मंगलवार

पुणे — Pune, Maharashtra · समय इस स्थान के समय-क्षेत्र में (Asia/Kolkata)

इस महीने का पंचांग (कैलेंडर)
सूर्योदय07:09
सूर्यास्त18:18
चंद्रोदय20:10
चंद्रास्त08:29
मास:
पौष (अमांत) · माघ (पूर्णिमांत)
संवत:
शक 1984 · विक्रम (चैत्रादि) 2119
संवत्सर:
चित्रभानु (शक-आधारित, महाराष्ट्र/दक्षिण परंपरा)
ऋतु · अयन:
हेमंत · उत्तरायण
सूर्य राशि:
मकर
चंद्र राशि:
कर्क 00:09 (17 जन॰) तक, फिर सिंह

पंचांग के अंग — सूर्योदय से अगले सूर्योदय तक

वार
मंगलवार
तिथि
कृष्ण द्वितीया 17:11 तक, फिर कृष्ण तृतीया 13:48 (17 जन॰) तक
नक्षत्र
आश्लेषा 00:09 (17 जन॰) तक, फिर मघा 21:38 (17 जन॰) तक
योग
प्रीति 16:19 तक, फिर आयुष्मान 12:17 (17 जन॰) तक
करण
गर 17:11 तक, फिर वणिज 03:27 (17 जन॰) तक, फिर विष्टि 13:48 (17 जन॰) तक

मुहूर्त-काल

  • अभिजित मुहूर्त12:21 – 13:06
  • राहु काल15:31 – 16:55
  • यमगंड09:56 – 11:20
  • गुलिक काल12:44 – 14:07

राहु काल, यमगंड और गुलिक परंपरा में नए शुभ कार्य के आरंभ के लिए टाले जाने वाले काल हैं — रोज़ के काम के लिए डरने का कारण नहीं।

चौघड़िया

दिन

  • रोग(वर्जित (परंपरा))07:09 – 08:33
  • उद्वेग(वर्जित (परंपरा))08:33 – 09:56
  • चर(सामान्य)09:56 – 11:20
  • लाभ(शुभ)11:20 – 12:44
  • अमृत(शुभ)12:44 – 14:07
  • काल(वर्जित (परंपरा))14:07 – 15:31
  • शुभ(शुभ)15:31 – 16:55
  • रोग(वर्जित (परंपरा))16:55 – 18:18

रात

  • काल(वर्जित (परंपरा))18:18 – 19:55
  • लाभ(शुभ)19:55 – 21:31
  • उद्वेग(वर्जित (परंपरा))21:31 – 23:07
  • शुभ(शुभ)23:07 – 00:44 (17 जन॰)
  • अमृत(शुभ)00:44 (17 जन॰) – 02:20 (17 जन॰)
  • चर(सामान्य)02:20 (17 जन॰) – 03:57 (17 जन॰)
  • रोग(वर्जित (परंपरा))03:57 (17 जन॰) – 05:33 (17 जन॰)
  • काल(वर्जित (परंपरा))05:33 (17 जन॰) – 07:09 (17 जन॰)

पुस्तक: पंचांग स्थान, सूर्योदय, समय-क्षेत्र और अयनांश पर निर्भर है — संस्कार, पर्व या मुहूर्त के लिए प्रकाशित स्थानीय पंचांग से समय सत्यापित करें।

निरयन लाहिड़ी अयनांश; सूर्योदय-सूर्यास्त सूर्य-बिंब के ऊपरी किनारे से, वायुमंडलीय अपवर्तन सहित। प्रकाशित पंचांगों से 1–2 मिनट का अंतर संभव।

पुस्तक में:अध्याय 3 · जन्म-विवरण से कुंडली कैसे बनती है · पृष्ठ 22

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