पंचांग 25 अप्रैल 2063
तिथि और स्थान चुनें — सूर्योदय से अगले सूर्योदय तक तिथि, नक्षत्र, योग, करण, राहु काल और चौघड़िया। गणना आपके फ़ोन पर ही होती है।
स्थान
तिथि (तारीख)
25 अप्रैल 2063 · बुधवार
पुणे — Pune, Maharashtra · समय इस स्थान के समय-क्षेत्र में (Asia/Kolkata)
इस महीने का पंचांग (कैलेंडर) सूर्योदय06:11
सूर्यास्त18:54
चंद्रोदय04:27 (26 अप्रैल)
चंद्रास्त16:11
- मास:
- चैत्र (अमांत) · वैशाख (पूर्णिमांत)
- संवत:
- शक 1985 · विक्रम (चैत्रादि) 2120
- संवत्सर:
- सुभानु (शक-आधारित, महाराष्ट्र/दक्षिण परंपरा)
- ऋतु · अयन:
- वसंत · उत्तरायण
- सूर्य राशि:
- मेष
- चंद्र राशि:
- कुंभ 09:27 तक, फिर मीन
पंचांग के अंग — सूर्योदय से अगले सूर्योदय तक
- वार
- बुधवार
- तिथि
- कृष्ण द्वादशी 18:34 तक, फिर कृष्ण त्रयोदशी 19:47 (26 अप्रैल) तक
- नक्षत्र
- पूर्वभाद्रपदा 16:00 तक, फिर उत्तरभाद्रपदा 17:52 (26 अप्रैल) तक
- योग
- इन्द्र 21:04 तक, फिर वैधृति 20:58 (26 अप्रैल) तक
- करण
- तैतिल 18:34 तक, फिर गर 07:15 (26 अप्रैल) तक
मुहूर्त-काल
- अभिजित मुहूर्त12:07 – 12:58परंपरा में बुधवार को अभिजित नहीं लिया जाता
- राहु काल12:32 – 14:08
- यमगंड07:46 – 09:21
- गुलिक काल10:57 – 12:32
राहु काल, यमगंड और गुलिक परंपरा में नए शुभ कार्य के आरंभ के लिए टाले जाने वाले काल हैं — रोज़ के काम के लिए डरने का कारण नहीं।
चौघड़िया
दिन
- लाभ(शुभ)06:11 – 07:46
- अमृत(शुभ)07:46 – 09:21
- काल(वर्जित (परंपरा))09:21 – 10:57
- शुभ(शुभ)10:57 – 12:32
- रोग(वर्जित (परंपरा))12:32 – 14:08
- उद्वेग(वर्जित (परंपरा))14:08 – 15:43
- चर(सामान्य)15:43 – 17:18
- लाभ(शुभ)17:18 – 18:54
रात
- उद्वेग(वर्जित (परंपरा))18:54 – 20:18
- शुभ(शुभ)20:18 – 21:43
- अमृत(शुभ)21:43 – 23:07
- चर(सामान्य)23:07 – 00:32 (26 अप्रैल)
- रोग(वर्जित (परंपरा))00:32 (26 अप्रैल) – 01:56 (26 अप्रैल)
- काल(वर्जित (परंपरा))01:56 (26 अप्रैल) – 03:21 (26 अप्रैल)
- लाभ(शुभ)03:21 (26 अप्रैल) – 04:45 (26 अप्रैल)
- उद्वेग(वर्जित (परंपरा))04:45 (26 अप्रैल) – 06:10 (26 अप्रैल)
पुस्तक: पंचांग स्थान, सूर्योदय, समय-क्षेत्र और अयनांश पर निर्भर है — संस्कार, पर्व या मुहूर्त के लिए प्रकाशित स्थानीय पंचांग से समय सत्यापित करें।
निरयन लाहिड़ी अयनांश; सूर्योदय-सूर्यास्त सूर्य-बिंब के ऊपरी किनारे से, वायुमंडलीय अपवर्तन सहित। प्रकाशित पंचांगों से 1–2 मिनट का अंतर संभव।
पुस्तक में:अध्याय 3 · जन्म-विवरण से कुंडली कैसे बनती है · पृष्ठ 22
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