पंचांग 19 जून 2063
तिथि और स्थान चुनें — सूर्योदय से अगले सूर्योदय तक तिथि, नक्षत्र, योग, करण, राहु काल और चौघड़िया। गणना आपके फ़ोन पर ही होती है।
स्थान
तिथि (तारीख)
19 जून 2063 · मंगलवार
पुणे — Pune, Maharashtra · समय इस स्थान के समय-क्षेत्र में (Asia/Kolkata)
इस महीने का पंचांग (कैलेंडर) सूर्योदय05:58
सूर्यास्त19:13
चंद्रोदय00:55 (20 जून)
चंद्रास्त12:43
- मास:
- ज्येष्ठ (अमांत) · आषाढ़ (पूर्णिमांत)
- संवत:
- शक 1985 · विक्रम (चैत्रादि) 2120
- संवत्सर:
- सुभानु (शक-आधारित, महाराष्ट्र/दक्षिण परंपरा)
- ऋतु · अयन:
- ग्रीष्म · उत्तरायण
- सूर्य राशि:
- मिथुन
- चंद्र राशि:
- मीन
पंचांग के अंग — सूर्योदय से अगले सूर्योदय तक
- वार
- मंगलवार
- तिथि
- कृष्ण अष्टमी 21:11 तक, फिर कृष्ण नवमी 22:39 (20 जून) तक
- नक्षत्र
- पूर्वभाद्रपदा 08:32 तक, फिर उत्तरभाद्रपदा 10:55 (20 जून) तक
- योग
- आयुष्मान 14:58 तक, फिर सौभाग्य 15:19 (20 जून) तक
- करण
- बालव 08:13 तक, फिर कौलव 21:11 तक, फिर तैतिल 10:00 (20 जून) तक
मुहूर्त-काल
- अभिजित मुहूर्त12:09 – 13:02
- राहु काल15:54 – 17:33
- यमगंड09:17 – 10:56
- गुलिक काल12:35 – 14:15
राहु काल, यमगंड और गुलिक परंपरा में नए शुभ कार्य के आरंभ के लिए टाले जाने वाले काल हैं — रोज़ के काम के लिए डरने का कारण नहीं।
चौघड़िया
दिन
- रोग(वर्जित (परंपरा))05:58 – 07:38
- उद्वेग(वर्जित (परंपरा))07:38 – 09:17
- चर(सामान्य)09:17 – 10:56
- लाभ(शुभ)10:56 – 12:35
- अमृत(शुभ)12:35 – 14:15
- काल(वर्जित (परंपरा))14:15 – 15:54
- शुभ(शुभ)15:54 – 17:33
- रोग(वर्जित (परंपरा))17:33 – 19:13
रात
- काल(वर्जित (परंपरा))19:13 – 20:33
- लाभ(शुभ)20:33 – 21:54
- उद्वेग(वर्जित (परंपरा))21:54 – 23:15
- शुभ(शुभ)23:15 – 00:36 (20 जून)
- अमृत(शुभ)00:36 (20 जून) – 01:56 (20 जून)
- चर(सामान्य)01:56 (20 जून) – 03:17 (20 जून)
- रोग(वर्जित (परंपरा))03:17 (20 जून) – 04:38 (20 जून)
- काल(वर्जित (परंपरा))04:38 (20 जून) – 05:58 (20 जून)
पुस्तक: पंचांग स्थान, सूर्योदय, समय-क्षेत्र और अयनांश पर निर्भर है — संस्कार, पर्व या मुहूर्त के लिए प्रकाशित स्थानीय पंचांग से समय सत्यापित करें।
निरयन लाहिड़ी अयनांश; सूर्योदय-सूर्यास्त सूर्य-बिंब के ऊपरी किनारे से, वायुमंडलीय अपवर्तन सहित। प्रकाशित पंचांगों से 1–2 मिनट का अंतर संभव।
पुस्तक में:अध्याय 3 · जन्म-विवरण से कुंडली कैसे बनती है · पृष्ठ 22
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