पंचांग 15 नवंबर 2063

तिथि और स्थान चुनें — सूर्योदय से अगले सूर्योदय तक तिथि, नक्षत्र, योग, करण, राहु काल और चौघड़िया। गणना आपके फ़ोन पर ही होती है।

स्थान
तिथि (तारीख)

15 नवंबर 2063 · गुरुवार

पुणे — Pune, Maharashtra · समय इस स्थान के समय-क्षेत्र में (Asia/Kolkata)

इस महीने का पंचांग (कैलेंडर)
सूर्योदय06:40
सूर्यास्त17:56
चंद्रोदय02:35 (16 नव॰)
चंद्रास्त14:14
मास:
कार्तिक (अमांत) · मार्गशीर्ष (पूर्णिमांत)
संवत:
शक 1985 · विक्रम (चैत्रादि) 2120
संवत्सर:
सुभानु (शक-आधारित, महाराष्ट्र/दक्षिण परंपरा)
ऋतु · अयन:
शरद · दक्षिणायन
सूर्य राशि:
तुला
चंद्र राशि:
सिंह 01:26 (16 नव॰) तक, फिर कन्या

पंचांग के अंग — सूर्योदय से अगले सूर्योदय तक

वार
गुरुवार
तिथि
कृष्ण दशमी 23:09 तक, फिर कृष्ण एकादशी 20:45 (16 नव॰) तक
नक्षत्र
पूर्वाफाल्गुनी 19:50 तक, फिर उत्तराफाल्गुनी 18:10 (16 नव॰) तक
योग
वैधृति 03:24 (16 नव॰) तक, फिर विष्कम्भ 00:14 (17 नव॰) तक
करण
वणिज 12:18 तक, फिर विष्टि 23:09 तक, फिर बव 09:58 (16 नव॰) तक

मुहूर्त-काल

  • अभिजित मुहूर्त11:56 – 12:41
  • राहु काल13:43 – 15:07
  • यमगंड06:40 – 08:05
  • गुलिक काल09:29 – 10:54

राहु काल, यमगंड और गुलिक परंपरा में नए शुभ कार्य के आरंभ के लिए टाले जाने वाले काल हैं — रोज़ के काम के लिए डरने का कारण नहीं।

चौघड़िया

दिन

  • शुभ(शुभ)06:40 – 08:05
  • रोग(वर्जित (परंपरा))08:05 – 09:29
  • उद्वेग(वर्जित (परंपरा))09:29 – 10:54
  • चर(सामान्य)10:54 – 12:18
  • लाभ(शुभ)12:18 – 13:43
  • अमृत(शुभ)13:43 – 15:07
  • काल(वर्जित (परंपरा))15:07 – 16:32
  • शुभ(शुभ)16:32 – 17:56

रात

  • अमृत(शुभ)17:56 – 19:32
  • चर(सामान्य)19:32 – 21:08
  • रोग(वर्जित (परंपरा))21:08 – 22:43
  • काल(वर्जित (परंपरा))22:43 – 00:19 (16 नव॰)
  • लाभ(शुभ)00:19 (16 नव॰) – 01:54 (16 नव॰)
  • उद्वेग(वर्जित (परंपरा))01:54 (16 नव॰) – 03:30 (16 नव॰)
  • शुभ(शुभ)03:30 (16 नव॰) – 05:05 (16 नव॰)
  • अमृत(शुभ)05:05 (16 नव॰) – 06:41 (16 नव॰)

पुस्तक: पंचांग स्थान, सूर्योदय, समय-क्षेत्र और अयनांश पर निर्भर है — संस्कार, पर्व या मुहूर्त के लिए प्रकाशित स्थानीय पंचांग से समय सत्यापित करें।

निरयन लाहिड़ी अयनांश; सूर्योदय-सूर्यास्त सूर्य-बिंब के ऊपरी किनारे से, वायुमंडलीय अपवर्तन सहित। प्रकाशित पंचांगों से 1–2 मिनट का अंतर संभव।

पुस्तक में:अध्याय 3 · जन्म-विवरण से कुंडली कैसे बनती है · पृष्ठ 22

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