पंचांग 13 जून 2064

तिथि और स्थान चुनें — सूर्योदय से अगले सूर्योदय तक तिथि, नक्षत्र, योग, करण, राहु काल और चौघड़िया। गणना आपके फ़ोन पर ही होती है।

स्थान
तिथि (तारीख)

13 जून 2064 · शुक्रवार

पुणे — Pune, Maharashtra · समय इस स्थान के समय-क्षेत्र में (Asia/Kolkata)

इस महीने का पंचांग (कैलेंडर)
सूर्योदय05:57
सूर्यास्त19:11
चंद्रोदय05:04 (14 जून)
चंद्रास्त17:55
मास:
अधिक ज्येष्ठ (अमांत) · आषाढ़ (पूर्णिमांत)
संवत:
शक 1986 · विक्रम (चैत्रादि) 2121
संवत्सर:
तारण (शक-आधारित, महाराष्ट्र/दक्षिण परंपरा)
ऋतु · अयन:
ग्रीष्म · उत्तरायण
सूर्य राशि:
वृषभ
चंद्र राशि:
वृषभ

पंचांग के अंग — सूर्योदय से अगले सूर्योदय तक

वार
शुक्रवार
तिथि
कृष्ण चतुर्दशी 03:54 (14 जून) तक, फिर कृष्ण अमावस्या 03:50 (15 जून) तक
नक्षत्र
कृत्तिका 14:54 तक, फिर रोहिणी 15:47 (14 जून) तक
योग
धृति 05:17 (14 जून) तक, फिर शूल 04:12 (15 जून) तक
करण
विष्टि 15:45 तक, फिर शकुनि 03:54 (14 जून) तक, फिर चतुष्पद 15:56 (14 जून) तक

मुहूर्त-काल

  • अभिजित मुहूर्त12:08 – 13:01
  • राहु काल10:55 – 12:34
  • यमगंड15:53 – 17:32
  • गुलिक काल07:37 – 09:16

राहु काल, यमगंड और गुलिक परंपरा में नए शुभ कार्य के आरंभ के लिए टाले जाने वाले काल हैं — रोज़ के काम के लिए डरने का कारण नहीं।

चौघड़िया

दिन

  • चर(सामान्य)05:57 – 07:37
  • लाभ(शुभ)07:37 – 09:16
  • अमृत(शुभ)09:16 – 10:55
  • काल(वर्जित (परंपरा))10:55 – 12:34
  • शुभ(शुभ)12:34 – 14:14
  • रोग(वर्जित (परंपरा))14:14 – 15:53
  • उद्वेग(वर्जित (परंपरा))15:53 – 17:32
  • चर(सामान्य)17:32 – 19:11

रात

  • रोग(वर्जित (परंपरा))19:11 – 20:32
  • काल(वर्जित (परंपरा))20:32 – 21:53
  • लाभ(शुभ)21:53 – 23:14
  • उद्वेग(वर्जित (परंपरा))23:14 – 00:34 (14 जून)
  • शुभ(शुभ)00:34 (14 जून) – 01:55 (14 जून)
  • अमृत(शुभ)01:55 (14 जून) – 03:16 (14 जून)
  • चर(सामान्य)03:16 (14 जून) – 04:37 (14 जून)
  • रोग(वर्जित (परंपरा))04:37 (14 जून) – 05:58 (14 जून)

पुस्तक: पंचांग स्थान, सूर्योदय, समय-क्षेत्र और अयनांश पर निर्भर है — संस्कार, पर्व या मुहूर्त के लिए प्रकाशित स्थानीय पंचांग से समय सत्यापित करें।

निरयन लाहिड़ी अयनांश; सूर्योदय-सूर्यास्त सूर्य-बिंब के ऊपरी किनारे से, वायुमंडलीय अपवर्तन सहित। प्रकाशित पंचांगों से 1–2 मिनट का अंतर संभव।

पुस्तक में:अध्याय 3 · जन्म-विवरण से कुंडली कैसे बनती है · पृष्ठ 22

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