पंचांग 15 जुलाई 2064
तिथि और स्थान चुनें — सूर्योदय से अगले सूर्योदय तक तिथि, नक्षत्र, योग, करण, राहु काल और चौघड़िया। गणना आपके फ़ोन पर ही होती है।
स्थान
तिथि (तारीख)
15 जुलाई 2064 · मंगलवार
पुणे — Pune, Maharashtra · समय इस स्थान के समय-क्षेत्र में (Asia/Kolkata)
इस महीने का पंचांग (कैलेंडर) सूर्योदय06:06
सूर्यास्त19:14
चंद्रोदय06:50
चंद्रास्त20:13
- मास:
- आषाढ़ (अमांत)
- संवत:
- शक 1986 · विक्रम (चैत्रादि) 2121
- संवत्सर:
- तारण (शक-आधारित, महाराष्ट्र/दक्षिण परंपरा)
- ऋतु · अयन:
- ग्रीष्म · उत्तरायण
- सूर्य राशि:
- मिथुन
- चंद्र राशि:
- कर्क
पंचांग के अंग — सूर्योदय से अगले सूर्योदय तक
- वार
- मंगलवार
- तिथि
- शुक्ल प्रतिपदा 12:28 तक, फिर शुक्ल द्वितीया 10:21 (16 जुल॰) तक
- नक्षत्र
- पुष्य 22:23 तक, फिर आश्लेषा 20:57 (16 जुल॰) तक
- योग
- हर्षण 07:36 तक, फिर वज्र 04:54 (16 जुल॰) तक, फिर सिद्धि 01:59 (17 जुल॰) तक
- करण
- बव 12:28 तक, फिर बालव 23:26 तक, फिर कौलव 10:21 (16 जुल॰) तक
मुहूर्त-काल
- अभिजित मुहूर्त12:14 – 13:06
- राहु काल15:57 – 17:36
- यमगंड09:23 – 11:02
- गुलिक काल12:40 – 14:19
राहु काल, यमगंड और गुलिक परंपरा में नए शुभ कार्य के आरंभ के लिए टाले जाने वाले काल हैं — रोज़ के काम के लिए डरने का कारण नहीं।
चौघड़िया
दिन
- रोग(वर्जित (परंपरा))06:06 – 07:45
- उद्वेग(वर्जित (परंपरा))07:45 – 09:23
- चर(सामान्य)09:23 – 11:02
- लाभ(शुभ)11:02 – 12:40
- अमृत(शुभ)12:40 – 14:19
- काल(वर्जित (परंपरा))14:19 – 15:57
- शुभ(शुभ)15:57 – 17:36
- रोग(वर्जित (परंपरा))17:36 – 19:14
रात
- काल(वर्जित (परंपरा))19:14 – 20:36
- लाभ(शुभ)20:36 – 21:57
- उद्वेग(वर्जित (परंपरा))21:57 – 23:19
- शुभ(शुभ)23:19 – 00:40 (16 जुल॰)
- अमृत(शुभ)00:40 (16 जुल॰) – 02:02 (16 जुल॰)
- चर(सामान्य)02:02 (16 जुल॰) – 03:23 (16 जुल॰)
- रोग(वर्जित (परंपरा))03:23 (16 जुल॰) – 04:45 (16 जुल॰)
- काल(वर्जित (परंपरा))04:45 (16 जुल॰) – 06:07 (16 जुल॰)
पुस्तक: पंचांग स्थान, सूर्योदय, समय-क्षेत्र और अयनांश पर निर्भर है — संस्कार, पर्व या मुहूर्त के लिए प्रकाशित स्थानीय पंचांग से समय सत्यापित करें।
निरयन लाहिड़ी अयनांश; सूर्योदय-सूर्यास्त सूर्य-बिंब के ऊपरी किनारे से, वायुमंडलीय अपवर्तन सहित। प्रकाशित पंचांगों से 1–2 मिनट का अंतर संभव।
पुस्तक में:अध्याय 3 · जन्म-विवरण से कुंडली कैसे बनती है · पृष्ठ 22
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