पंचांग 21 अक्टूबर 2064
तिथि और स्थान चुनें — सूर्योदय से अगले सूर्योदय तक तिथि, नक्षत्र, योग, करण, राहु काल और चौघड़िया। गणना आपके फ़ोन पर ही होती है।
स्थान
तिथि (तारीख)
21 अक्टूबर 2064 · मंगलवार
पुणे — Pune, Maharashtra · समय इस स्थान के समय-क्षेत्र में (Asia/Kolkata)
इस महीने का पंचांग (कैलेंडर) सूर्योदय06:30
सूर्यास्त18:07
चंद्रोदय15:42
चंद्रास्त03:58 (22 अक्टू॰)
- मास:
- आश्विन (अमांत)
- संवत:
- शक 1986 · विक्रम (चैत्रादि) 2121
- संवत्सर:
- तारण (शक-आधारित, महाराष्ट्र/दक्षिण परंपरा)
- ऋतु · अयन:
- शरद · दक्षिणायन
- सूर्य राशि:
- तुला
- चंद्र राशि:
- कुंभ
पंचांग के अंग — सूर्योदय से अगले सूर्योदय तक
- वार
- मंगलवार
- तिथि
- शुक्ल द्वादशी 05:07 (22 अक्टू॰) तक, फिर शुक्ल त्रयोदशी 07:37 (23 अक्टू॰) तक
- नक्षत्र
- शतभिषा 11:45 तक, फिर पूर्वभाद्रपदा 14:40 (22 अक्टू॰) तक
- योग
- वृद्धि 16:55 तक, फिर ध्रुव 17:46 (22 अक्टू॰) तक
- करण
- बव 15:54 तक, फिर बालव 05:07 (22 अक्टू॰) तक, फिर कौलव 18:21 (22 अक्टू॰) तक
मुहूर्त-काल
- अभिजित मुहूर्त11:55 – 12:42
- राहु काल15:13 – 16:40
- यमगंड09:24 – 10:51
- गुलिक काल12:18 – 13:46
राहु काल, यमगंड और गुलिक परंपरा में नए शुभ कार्य के आरंभ के लिए टाले जाने वाले काल हैं — रोज़ के काम के लिए डरने का कारण नहीं।
चौघड़िया
दिन
- रोग(वर्जित (परंपरा))06:30 – 07:57
- उद्वेग(वर्जित (परंपरा))07:57 – 09:24
- चर(सामान्य)09:24 – 10:51
- लाभ(शुभ)10:51 – 12:18
- अमृत(शुभ)12:18 – 13:46
- काल(वर्जित (परंपरा))13:46 – 15:13
- शुभ(शुभ)15:13 – 16:40
- रोग(वर्जित (परंपरा))16:40 – 18:07
रात
- काल(वर्जित (परंपरा))18:07 – 19:40
- लाभ(शुभ)19:40 – 21:13
- उद्वेग(वर्जित (परंपरा))21:13 – 22:46
- शुभ(शुभ)22:46 – 00:19 (22 अक्टू॰)
- अमृत(शुभ)00:19 (22 अक्टू॰) – 01:52 (22 अक्टू॰)
- चर(सामान्य)01:52 (22 अक्टू॰) – 03:24 (22 अक्टू॰)
- रोग(वर्जित (परंपरा))03:24 (22 अक्टू॰) – 04:57 (22 अक्टू॰)
- काल(वर्जित (परंपरा))04:57 (22 अक्टू॰) – 06:30 (22 अक्टू॰)
पुस्तक: पंचांग स्थान, सूर्योदय, समय-क्षेत्र और अयनांश पर निर्भर है — संस्कार, पर्व या मुहूर्त के लिए प्रकाशित स्थानीय पंचांग से समय सत्यापित करें।
निरयन लाहिड़ी अयनांश; सूर्योदय-सूर्यास्त सूर्य-बिंब के ऊपरी किनारे से, वायुमंडलीय अपवर्तन सहित। प्रकाशित पंचांगों से 1–2 मिनट का अंतर संभव।
पुस्तक में:अध्याय 3 · जन्म-विवरण से कुंडली कैसे बनती है · पृष्ठ 22
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