पंचांग 21 जून 2065

तिथि और स्थान चुनें — सूर्योदय से अगले सूर्योदय तक तिथि, नक्षत्र, योग, करण, राहु काल और चौघड़िया। गणना आपके फ़ोन पर ही होती है।

स्थान
तिथि (तारीख)

21 जून 2065 · रविवार

पुणे — Pune, Maharashtra · समय इस स्थान के समय-क्षेत्र में (Asia/Kolkata)

इस महीने का पंचांग (कैलेंडर)
सूर्योदय05:59
सूर्यास्त19:13
चंद्रोदय22:00
चंद्रास्त08:46
मास:
ज्येष्ठ (अमांत) · आषाढ़ (पूर्णिमांत)
संवत:
शक 1987 · विक्रम (चैत्रादि) 2122
संवत्सर:
पार्थिव (शक-आधारित, महाराष्ट्र/दक्षिण परंपरा)
ऋतु · अयन:
ग्रीष्म · उत्तरायण
सूर्य राशि:
मिथुन
चंद्र राशि:
मकर

पंचांग के अंग — सूर्योदय से अगले सूर्योदय तक

वार
रविवार
तिथि
कृष्ण तृतीया 07:25 तक, फिर कृष्ण चतुर्थी 06:09 (22 जून) तक
नक्षत्र
श्रवण 04:12 (22 जून) तक, फिर धनिष्ठा 04:22 (23 जून) तक
योग
इन्द्र 06:49 तक, फिर वैधृति 04:44 (22 जून) तक, फिर विष्कम्भ 03:17 (23 जून) तक
करण
विष्टि 07:25 तक, फिर बव 18:41 तक, फिर बालव 06:09 (22 जून) तक

मुहूर्त-काल

  • अभिजित मुहूर्त12:10 – 13:03
  • राहु काल17:34 – 19:13
  • यमगंड12:36 – 14:15
  • गुलिक काल15:55 – 17:34

राहु काल, यमगंड और गुलिक परंपरा में नए शुभ कार्य के आरंभ के लिए टाले जाने वाले काल हैं — रोज़ के काम के लिए डरने का कारण नहीं।

चौघड़िया

दिन

  • उद्वेग(वर्जित (परंपरा))05:59 – 07:38
  • चर(सामान्य)07:38 – 09:17
  • लाभ(शुभ)09:17 – 10:57
  • अमृत(शुभ)10:57 – 12:36
  • काल(वर्जित (परंपरा))12:36 – 14:15
  • शुभ(शुभ)14:15 – 15:55
  • रोग(वर्जित (परंपरा))15:55 – 17:34
  • उद्वेग(वर्जित (परंपरा))17:34 – 19:13

रात

  • शुभ(शुभ)19:13 – 20:34
  • अमृत(शुभ)20:34 – 21:55
  • चर(सामान्य)21:55 – 23:15
  • रोग(वर्जित (परंपरा))23:15 – 00:36 (22 जून)
  • काल(वर्जित (परंपरा))00:36 (22 जून) – 01:57 (22 जून)
  • लाभ(शुभ)01:57 (22 जून) – 03:18 (22 जून)
  • उद्वेग(वर्जित (परंपरा))03:18 (22 जून) – 04:38 (22 जून)
  • शुभ(शुभ)04:38 (22 जून) – 05:59 (22 जून)

पुस्तक: पंचांग स्थान, सूर्योदय, समय-क्षेत्र और अयनांश पर निर्भर है — संस्कार, पर्व या मुहूर्त के लिए प्रकाशित स्थानीय पंचांग से समय सत्यापित करें।

निरयन लाहिड़ी अयनांश; सूर्योदय-सूर्यास्त सूर्य-बिंब के ऊपरी किनारे से, वायुमंडलीय अपवर्तन सहित। प्रकाशित पंचांगों से 1–2 मिनट का अंतर संभव।

पुस्तक में:अध्याय 3 · जन्म-विवरण से कुंडली कैसे बनती है · पृष्ठ 22

अपनी कुंडली देखें