पंचांग 31 जुलाई 2065

तिथि और स्थान चुनें — सूर्योदय से अगले सूर्योदय तक तिथि, नक्षत्र, योग, करण, राहु काल और चौघड़िया। गणना आपके फ़ोन पर ही होती है।

स्थान
तिथि (तारीख)

31 जुलाई 2065 · शुक्रवार

पुणे — Pune, Maharashtra · समय इस स्थान के समय-क्षेत्र में (Asia/Kolkata)

इस महीने का पंचांग (कैलेंडर)
सूर्योदय06:12
सूर्यास्त19:09
चंद्रोदय05:09 (1 अग॰)
चंद्रास्त17:47
मास:
आषाढ़ (अमांत) · श्रावण (पूर्णिमांत)
संवत:
शक 1987 · विक्रम (चैत्रादि) 2122
संवत्सर:
पार्थिव (शक-आधारित, महाराष्ट्र/दक्षिण परंपरा)
ऋतु · अयन:
ग्रीष्म · दक्षिणायन
सूर्य राशि:
कर्क
चंद्र राशि:
मिथुन 05:58 (1 अग॰) तक, फिर कर्क

पंचांग के अंग — सूर्योदय से अगले सूर्योदय तक

वार
शुक्रवार
तिथि
कृष्ण त्रयोदशी 10:36 तक, फिर कृष्ण चतुर्दशी 11:13 (1 अग॰) तक
नक्षत्र
आर्द्रा 10:58 तक, फिर पुनर्वसु 12:14 (1 अग॰) तक
योग
हर्षण 16:01 तक, फिर वज्र 15:25 (1 अग॰) तक
करण
वणिज 10:36 तक, फिर विष्टि 22:59 तक, फिर शकुनि 11:13 (1 अग॰) तक

मुहूर्त-काल

  • अभिजित मुहूर्त12:15 – 13:06
  • राहु काल11:03 – 12:40
  • यमगंड15:55 – 17:32
  • गुलिक काल07:49 – 09:26

राहु काल, यमगंड और गुलिक परंपरा में नए शुभ कार्य के आरंभ के लिए टाले जाने वाले काल हैं — रोज़ के काम के लिए डरने का कारण नहीं।

चौघड़िया

दिन

  • चर(सामान्य)06:12 – 07:49
  • लाभ(शुभ)07:49 – 09:26
  • अमृत(शुभ)09:26 – 11:03
  • काल(वर्जित (परंपरा))11:03 – 12:40
  • शुभ(शुभ)12:40 – 14:18
  • रोग(वर्जित (परंपरा))14:18 – 15:55
  • उद्वेग(वर्जित (परंपरा))15:55 – 17:32
  • चर(सामान्य)17:32 – 19:09

रात

  • रोग(वर्जित (परंपरा))19:09 – 20:32
  • काल(वर्जित (परंपरा))20:32 – 21:55
  • लाभ(शुभ)21:55 – 23:18
  • उद्वेग(वर्जित (परंपरा))23:18 – 00:41 (1 अग॰)
  • शुभ(शुभ)00:41 (1 अग॰) – 02:03 (1 अग॰)
  • अमृत(शुभ)02:03 (1 अग॰) – 03:26 (1 अग॰)
  • चर(सामान्य)03:26 (1 अग॰) – 04:49 (1 अग॰)
  • रोग(वर्जित (परंपरा))04:49 (1 अग॰) – 06:12 (1 अग॰)

पुस्तक: पंचांग स्थान, सूर्योदय, समय-क्षेत्र और अयनांश पर निर्भर है — संस्कार, पर्व या मुहूर्त के लिए प्रकाशित स्थानीय पंचांग से समय सत्यापित करें।

निरयन लाहिड़ी अयनांश; सूर्योदय-सूर्यास्त सूर्य-बिंब के ऊपरी किनारे से, वायुमंडलीय अपवर्तन सहित। प्रकाशित पंचांगों से 1–2 मिनट का अंतर संभव।

पुस्तक में:अध्याय 3 · जन्म-विवरण से कुंडली कैसे बनती है · पृष्ठ 22

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