पंचांग 22 सितंबर 2065
तिथि और स्थान चुनें — सूर्योदय से अगले सूर्योदय तक तिथि, नक्षत्र, योग, करण, राहु काल और चौघड़िया। गणना आपके फ़ोन पर ही होती है।
स्थान
तिथि (तारीख)
22 सितंबर 2065 · मंगलवार
पुणे — Pune, Maharashtra · समय इस स्थान के समय-क्षेत्र में (Asia/Kolkata)
इस महीने का पंचांग (कैलेंडर) सूर्योदय06:23
सूर्यास्त18:30
चंद्रोदय23:51
चंद्रास्त12:41
- मास:
- भाद्रपद (अमांत) · आश्विन (पूर्णिमांत)
- संवत:
- शक 1987 · विक्रम (चैत्रादि) 2122
- संवत्सर:
- पार्थिव (शक-आधारित, महाराष्ट्र/दक्षिण परंपरा)
- ऋतु · अयन:
- वर्षा · दक्षिणायन
- सूर्य राशि:
- कन्या
- चंद्र राशि:
- वृषभ 12:33 तक, फिर मिथुन
पंचांग के अंग — सूर्योदय से अगले सूर्योदय तक
- वार
- मंगलवार
- तिथि
- कृष्ण सप्तमी 10:31 तक, फिर कृष्ण अष्टमी 12:39 (23 सित॰) तक
- नक्षत्र
- मृगशीर्ष 01:56 (23 सित॰) तक, फिर आर्द्रा 04:19 (24 सित॰) तक
- योग
- सिद्धि 09:19 तक, फिर व्यतीपात 10:00 (23 सित॰) तक
- करण
- बव 10:31 तक, फिर बालव 23:39 तक, फिर कौलव 12:39 (23 सित॰) तक
मुहूर्त-काल
- अभिजित मुहूर्त12:02 – 12:51
- राहु काल15:28 – 16:59
- यमगंड09:25 – 10:56
- गुलिक काल12:27 – 13:57
राहु काल, यमगंड और गुलिक परंपरा में नए शुभ कार्य के आरंभ के लिए टाले जाने वाले काल हैं — रोज़ के काम के लिए डरने का कारण नहीं।
चौघड़िया
दिन
- रोग(वर्जित (परंपरा))06:23 – 07:54
- उद्वेग(वर्जित (परंपरा))07:54 – 09:25
- चर(सामान्य)09:25 – 10:56
- लाभ(शुभ)10:56 – 12:27
- अमृत(शुभ)12:27 – 13:57
- काल(वर्जित (परंपरा))13:57 – 15:28
- शुभ(शुभ)15:28 – 16:59
- रोग(वर्जित (परंपरा))16:59 – 18:30
रात
- काल(वर्जित (परंपरा))18:30 – 19:59
- लाभ(शुभ)19:59 – 21:28
- उद्वेग(वर्जित (परंपरा))21:28 – 22:57
- शुभ(शुभ)22:57 – 00:27 (23 सित॰)
- अमृत(शुभ)00:27 (23 सित॰) – 01:56 (23 सित॰)
- चर(सामान्य)01:56 (23 सित॰) – 03:25 (23 सित॰)
- रोग(वर्जित (परंपरा))03:25 (23 सित॰) – 04:54 (23 सित॰)
- काल(वर्जित (परंपरा))04:54 (23 सित॰) – 06:23 (23 सित॰)
पुस्तक: पंचांग स्थान, सूर्योदय, समय-क्षेत्र और अयनांश पर निर्भर है — संस्कार, पर्व या मुहूर्त के लिए प्रकाशित स्थानीय पंचांग से समय सत्यापित करें।
निरयन लाहिड़ी अयनांश; सूर्योदय-सूर्यास्त सूर्य-बिंब के ऊपरी किनारे से, वायुमंडलीय अपवर्तन सहित। प्रकाशित पंचांगों से 1–2 मिनट का अंतर संभव।
पुस्तक में:अध्याय 3 · जन्म-विवरण से कुंडली कैसे बनती है · पृष्ठ 22
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