पंचांग 26 अक्टूबर 2065

तिथि और स्थान चुनें — सूर्योदय से अगले सूर्योदय तक तिथि, नक्षत्र, योग, करण, राहु काल और चौघड़िया। गणना आपके फ़ोन पर ही होती है।

स्थान
तिथि (तारीख)

26 अक्टूबर 2065 · सोमवार

पुणे — Pune, Maharashtra · समय इस स्थान के समय-क्षेत्र में (Asia/Kolkata)

इस महीने का पंचांग (कैलेंडर)
सूर्योदय06:32
सूर्यास्त18:04
चंद्रोदय04:04 (27 अक्टू॰)
चंद्रास्त15:33
मास:
आश्विन (अमांत) · कार्तिक (पूर्णिमांत)
संवत:
शक 1987 · विक्रम (चैत्रादि) 2122
संवत्सर:
पार्थिव (शक-आधारित, महाराष्ट्र/दक्षिण परंपरा)
ऋतु · अयन:
शरद · दक्षिणायन
सूर्य राशि:
तुला
चंद्र राशि:
सिंह 21:24 तक, फिर कन्या

पंचांग के अंग — सूर्योदय से अगले सूर्योदय तक

वार
सोमवार
तिथि
कृष्ण द्वादशी 02:51 (27 अक्टू॰) तक, फिर कृष्ण त्रयोदशी 00:08 (28 अक्टू॰) तक
नक्षत्र
पूर्वाफाल्गुनी 15:45 तक, फिर उत्तराफाल्गुनी 14:05 (27 अक्टू॰) तक
योग
ब्रह्म 12:24 तक, फिर इन्द्र 09:22 (27 अक्टू॰) तक
करण
कौलव 15:58 तक, फिर तैतिल 02:51 (27 अक्टू॰) तक, फिर गर 13:34 (27 अक्टू॰) तक

मुहूर्त-काल

  • अभिजित मुहूर्त11:55 – 12:41
  • राहु काल07:58 – 09:25
  • यमगंड10:51 – 12:18
  • गुलिक काल13:44 – 15:11

राहु काल, यमगंड और गुलिक परंपरा में नए शुभ कार्य के आरंभ के लिए टाले जाने वाले काल हैं — रोज़ के काम के लिए डरने का कारण नहीं।

चौघड़िया

दिन

  • अमृत(शुभ)06:32 – 07:58
  • काल(वर्जित (परंपरा))07:58 – 09:25
  • शुभ(शुभ)09:25 – 10:51
  • रोग(वर्जित (परंपरा))10:51 – 12:18
  • उद्वेग(वर्जित (परंपरा))12:18 – 13:44
  • चर(सामान्य)13:44 – 15:11
  • लाभ(शुभ)15:11 – 16:38
  • अमृत(शुभ)16:38 – 18:04

रात

  • चर(सामान्य)18:04 – 19:38
  • रोग(वर्जित (परंपरा))19:38 – 21:11
  • काल(वर्जित (परंपरा))21:11 – 22:45
  • लाभ(शुभ)22:45 – 00:18 (27 अक्टू॰)
  • उद्वेग(वर्जित (परंपरा))00:18 (27 अक्टू॰) – 01:52 (27 अक्टू॰)
  • शुभ(शुभ)01:52 (27 अक्टू॰) – 03:25 (27 अक्टू॰)
  • अमृत(शुभ)03:25 (27 अक्टू॰) – 04:58 (27 अक्टू॰)
  • चर(सामान्य)04:58 (27 अक्टू॰) – 06:32 (27 अक्टू॰)

पुस्तक: पंचांग स्थान, सूर्योदय, समय-क्षेत्र और अयनांश पर निर्भर है — संस्कार, पर्व या मुहूर्त के लिए प्रकाशित स्थानीय पंचांग से समय सत्यापित करें।

निरयन लाहिड़ी अयनांश; सूर्योदय-सूर्यास्त सूर्य-बिंब के ऊपरी किनारे से, वायुमंडलीय अपवर्तन सहित। प्रकाशित पंचांगों से 1–2 मिनट का अंतर संभव।

पुस्तक में:अध्याय 3 · जन्म-विवरण से कुंडली कैसे बनती है · पृष्ठ 22

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