पंचांग 22 फ़रवरी 2066

तिथि और स्थान चुनें — सूर्योदय से अगले सूर्योदय तक तिथि, नक्षत्र, योग, करण, राहु काल और चौघड़िया। गणना आपके फ़ोन पर ही होती है।

स्थान
तिथि (तारीख)

22 फ़रवरी 2066 · सोमवार

पुणे — Pune, Maharashtra · समय इस स्थान के समय-क्षेत्र में (Asia/Kolkata)

इस महीने का पंचांग (कैलेंडर)
सूर्योदय06:58
सूर्यास्त18:37
चंद्रोदय05:55 (23 फ़र॰)
चंद्रास्त16:46
मास:
माघ (अमांत) · फाल्गुन (पूर्णिमांत)
संवत:
शक 1987 · विक्रम (चैत्रादि) 2122
संवत्सर:
पार्थिव (शक-आधारित, महाराष्ट्र/दक्षिण परंपरा)
ऋतु · अयन:
शिशिर · उत्तरायण
सूर्य राशि:
कुंभ
चंद्र राशि:
मकर

पंचांग के अंग — सूर्योदय से अगले सूर्योदय तक

वार
सोमवार
तिथि
कृष्ण त्रयोदशी 17:50 तक, फिर कृष्ण चतुर्दशी 15:56 (23 फ़र॰) तक
नक्षत्र
उत्तराषाढ़ा 08:40 तक, फिर श्रवण 07:22 (23 फ़र॰) तक
योग
वरीयान 02:06 (23 फ़र॰) तक, फिर परिघ 23:26 (23 फ़र॰) तक
करण
वणिज 17:50 तक, फिर विष्टि 04:51 (23 फ़र॰) तक, फिर शकुनि 15:56 (23 फ़र॰) तक

मुहूर्त-काल

  • अभिजित मुहूर्त12:24 – 13:11
  • राहु काल08:25 – 09:53
  • यमगंड11:20 – 12:48
  • गुलिक काल14:15 – 15:43

राहु काल, यमगंड और गुलिक परंपरा में नए शुभ कार्य के आरंभ के लिए टाले जाने वाले काल हैं — रोज़ के काम के लिए डरने का कारण नहीं।

चौघड़िया

दिन

  • अमृत(शुभ)06:58 – 08:25
  • काल(वर्जित (परंपरा))08:25 – 09:53
  • शुभ(शुभ)09:53 – 11:20
  • रोग(वर्जित (परंपरा))11:20 – 12:48
  • उद्वेग(वर्जित (परंपरा))12:48 – 14:15
  • चर(सामान्य)14:15 – 15:43
  • लाभ(शुभ)15:43 – 17:10
  • अमृत(शुभ)17:10 – 18:37

रात

  • चर(सामान्य)18:37 – 20:10
  • रोग(वर्जित (परंपरा))20:10 – 21:42
  • काल(वर्जित (परंपरा))21:42 – 23:15
  • लाभ(शुभ)23:15 – 00:47 (23 फ़र॰)
  • उद्वेग(वर्जित (परंपरा))00:47 (23 फ़र॰) – 02:20 (23 फ़र॰)
  • शुभ(शुभ)02:20 (23 फ़र॰) – 03:52 (23 फ़र॰)
  • अमृत(शुभ)03:52 (23 फ़र॰) – 05:25 (23 फ़र॰)
  • चर(सामान्य)05:25 (23 फ़र॰) – 06:57 (23 फ़र॰)

पुस्तक: पंचांग स्थान, सूर्योदय, समय-क्षेत्र और अयनांश पर निर्भर है — संस्कार, पर्व या मुहूर्त के लिए प्रकाशित स्थानीय पंचांग से समय सत्यापित करें।

निरयन लाहिड़ी अयनांश; सूर्योदय-सूर्यास्त सूर्य-बिंब के ऊपरी किनारे से, वायुमंडलीय अपवर्तन सहित। प्रकाशित पंचांगों से 1–2 मिनट का अंतर संभव।

पुस्तक में:अध्याय 3 · जन्म-विवरण से कुंडली कैसे बनती है · पृष्ठ 22

अपनी कुंडली देखें