पंचांग 18 अप्रैल 2066
तिथि और स्थान चुनें — सूर्योदय से अगले सूर्योदय तक तिथि, नक्षत्र, योग, करण, राहु काल और चौघड़िया। गणना आपके फ़ोन पर ही होती है।
स्थान
तिथि (तारीख)
18 अप्रैल 2066 · रविवार
पुणे — Pune, Maharashtra · समय इस स्थान के समय-क्षेत्र में (Asia/Kolkata)
इस महीने का पंचांग (कैलेंडर) सूर्योदय06:15
सूर्यास्त18:52
चंद्रोदय02:33 (19 अप्रैल)
चंद्रास्त13:32
- मास:
- चैत्र (अमांत) · वैशाख (पूर्णिमांत)
- संवत:
- शक 1988 · विक्रम (चैत्रादि) 2123
- संवत्सर:
- व्यय (शक-आधारित, महाराष्ट्र/दक्षिण परंपरा)
- ऋतु · अयन:
- वसंत · उत्तरायण
- सूर्य राशि:
- मेष
- चंद्र राशि:
- मकर
पंचांग के अंग — सूर्योदय से अगले सूर्योदय तक
- वार
- रविवार
- तिथि
- कृष्ण नवमी 17:45 तक, फिर कृष्ण दशमी 16:49 (19 अप्रैल) तक
- नक्षत्र
- श्रवण 20:06 तक, फिर धनिष्ठा 19:55 (19 अप्रैल) तक
- योग
- साध्य 13:21 तक, फिर शुभ 11:26 (19 अप्रैल) तक
- करण
- तैतिल 06:22 तक, फिर गर 17:45 तक, फिर वणिज 05:14 (19 अप्रैल) तक, फिर विष्टि 16:49 (19 अप्रैल) तक
मुहूर्त-काल
- अभिजित मुहूर्त12:08 – 12:59
- राहु काल17:17 – 18:52
- यमगंड12:34 – 14:08
- गुलिक काल15:43 – 17:17
राहु काल, यमगंड और गुलिक परंपरा में नए शुभ कार्य के आरंभ के लिए टाले जाने वाले काल हैं — रोज़ के काम के लिए डरने का कारण नहीं।
चौघड़िया
दिन
- उद्वेग(वर्जित (परंपरा))06:15 – 07:50
- चर(सामान्य)07:50 – 09:24
- लाभ(शुभ)09:24 – 10:59
- अमृत(शुभ)10:59 – 12:34
- काल(वर्जित (परंपरा))12:34 – 14:08
- शुभ(शुभ)14:08 – 15:43
- रोग(वर्जित (परंपरा))15:43 – 17:17
- उद्वेग(वर्जित (परंपरा))17:17 – 18:52
रात
- शुभ(शुभ)18:52 – 20:17
- अमृत(शुभ)20:17 – 21:43
- चर(सामान्य)21:43 – 23:08
- रोग(वर्जित (परंपरा))23:08 – 00:33 (19 अप्रैल)
- काल(वर्जित (परंपरा))00:33 (19 अप्रैल) – 01:58 (19 अप्रैल)
- लाभ(शुभ)01:58 (19 अप्रैल) – 03:24 (19 अप्रैल)
- उद्वेग(वर्जित (परंपरा))03:24 (19 अप्रैल) – 04:49 (19 अप्रैल)
- शुभ(शुभ)04:49 (19 अप्रैल) – 06:14 (19 अप्रैल)
पुस्तक: पंचांग स्थान, सूर्योदय, समय-क्षेत्र और अयनांश पर निर्भर है — संस्कार, पर्व या मुहूर्त के लिए प्रकाशित स्थानीय पंचांग से समय सत्यापित करें।
निरयन लाहिड़ी अयनांश; सूर्योदय-सूर्यास्त सूर्य-बिंब के ऊपरी किनारे से, वायुमंडलीय अपवर्तन सहित। प्रकाशित पंचांगों से 1–2 मिनट का अंतर संभव।
पुस्तक में:अध्याय 3 · जन्म-विवरण से कुंडली कैसे बनती है · पृष्ठ 22
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