पंचांग 11 जनवरी 2067
तिथि और स्थान चुनें — सूर्योदय से अगले सूर्योदय तक तिथि, नक्षत्र, योग, करण, राहु काल और चौघड़िया। गणना आपके फ़ोन पर ही होती है।
स्थान
तिथि (तारीख)
11 जनवरी 2067 · मंगलवार
पुणे — Pune, Maharashtra · समय इस स्थान के समय-क्षेत्र में (Asia/Kolkata)
इस महीने का पंचांग (कैलेंडर) सूर्योदय07:09
सूर्यास्त18:15
चंद्रोदय03:41 (12 जन॰)
चंद्रास्त14:03
- मास:
- पौष (अमांत) · माघ (पूर्णिमांत)
- संवत:
- शक 1988 · विक्रम (चैत्रादि) 2123
- संवत्सर:
- व्यय (शक-आधारित, महाराष्ट्र/दक्षिण परंपरा)
- ऋतु · अयन:
- हेमंत · दक्षिणायन
- सूर्य राशि:
- धनु
- चंद्र राशि:
- तुला 14:52 तक, फिर वृश्चिक
पंचांग के अंग — सूर्योदय से अगले सूर्योदय तक
- वार
- मंगलवार
- तिथि
- कृष्ण दशमी 08:16 तक, फिर कृष्ण एकादशी 06:07 (12 जन॰) तक, फिर कृष्ण द्वादशी 03:22 (13 जन॰) तक
- नक्षत्र
- विशाखा 20:31 तक, फिर अनुराधा 18:42 (12 जन॰) तक
- योग
- शूल 20:32 तक, फिर गण्ड 17:17 (12 जन॰) तक
- करण
- विष्टि 08:16 तक, फिर बव 19:17 तक, फिर बालव 06:07 (12 जन॰) तक, फिर कौलव 16:49 (12 जन॰) तक
मुहूर्त-काल
- अभिजित मुहूर्त12:20 – 13:04
- राहु काल15:28 – 16:52
- यमगंड09:55 – 11:19
- गुलिक काल12:42 – 14:05
राहु काल, यमगंड और गुलिक परंपरा में नए शुभ कार्य के आरंभ के लिए टाले जाने वाले काल हैं — रोज़ के काम के लिए डरने का कारण नहीं।
चौघड़िया
दिन
- रोग(वर्जित (परंपरा))07:09 – 08:32
- उद्वेग(वर्जित (परंपरा))08:32 – 09:55
- चर(सामान्य)09:55 – 11:19
- लाभ(शुभ)11:19 – 12:42
- अमृत(शुभ)12:42 – 14:05
- काल(वर्जित (परंपरा))14:05 – 15:28
- शुभ(शुभ)15:28 – 16:52
- रोग(वर्जित (परंपरा))16:52 – 18:15
रात
- काल(वर्जित (परंपरा))18:15 – 19:52
- लाभ(शुभ)19:52 – 21:28
- उद्वेग(वर्जित (परंपरा))21:28 – 23:05
- शुभ(शुभ)23:05 – 00:42 (12 जन॰)
- अमृत(शुभ)00:42 (12 जन॰) – 02:19 (12 जन॰)
- चर(सामान्य)02:19 (12 जन॰) – 03:55 (12 जन॰)
- रोग(वर्जित (परंपरा))03:55 (12 जन॰) – 05:32 (12 जन॰)
- काल(वर्जित (परंपरा))05:32 (12 जन॰) – 07:09 (12 जन॰)
पुस्तक: पंचांग स्थान, सूर्योदय, समय-क्षेत्र और अयनांश पर निर्भर है — संस्कार, पर्व या मुहूर्त के लिए प्रकाशित स्थानीय पंचांग से समय सत्यापित करें।
निरयन लाहिड़ी अयनांश; सूर्योदय-सूर्यास्त सूर्य-बिंब के ऊपरी किनारे से, वायुमंडलीय अपवर्तन सहित। प्रकाशित पंचांगों से 1–2 मिनट का अंतर संभव।
पुस्तक में:अध्याय 3 · जन्म-विवरण से कुंडली कैसे बनती है · पृष्ठ 22
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