पंचांग 19 जनवरी 2067

तिथि और स्थान चुनें — सूर्योदय से अगले सूर्योदय तक तिथि, नक्षत्र, योग, करण, राहु काल और चौघड़िया। गणना आपके फ़ोन पर ही होती है।

स्थान
तिथि (तारीख)

19 जनवरी 2067 · बुधवार

पुणे — Pune, Maharashtra · समय इस स्थान के समय-क्षेत्र में (Asia/Kolkata)

इस महीने का पंचांग (कैलेंडर)
सूर्योदय07:09
सूर्यास्त18:20
चंद्रोदय09:56
चंद्रास्त22:27
मास:
माघ (अमांत)
संवत:
शक 1988 · विक्रम (चैत्रादि) 2123
संवत्सर:
व्यय (शक-आधारित, महाराष्ट्र/दक्षिण परंपरा)
ऋतु · अयन:
शिशिर · उत्तरायण
सूर्य राशि:
मकर
चंद्र राशि:
कुंभ 16:49 तक, फिर मीन

पंचांग के अंग — सूर्योदय से अगले सूर्योदय तक

वार
बुधवार
तिथि
शुक्ल पंचमी 01:24 (20 जन॰) तक, फिर शुक्ल षष्ठी 00:07 (21 जन॰) तक
नक्षत्र
पूर्वाभाद्रपदा 22:31 तक, फिर उत्तराभाद्रपदा 21:48 (20 जन॰) तक
योग
वरीयान 09:29 तक, फिर परिघ 06:44 (20 जन॰) तक, फिर शिव 04:38 (21 जन॰) तक
करण
बव 14:21 तक, फिर बालव 01:24 (20 जन॰) तक, फिर कौलव 12:40 (20 जन॰) तक

मुहूर्त-काल

  • अभिजित मुहूर्त12:22 – 13:07परंपरा में बुधवार को अभिजित नहीं लिया जाता
  • राहु काल12:45 – 14:09
  • यमगंड08:33 – 09:57
  • गुलिक काल11:21 – 12:45

राहु काल, यमगंड और गुलिक परंपरा में नए शुभ कार्य के आरंभ के लिए टाले जाने वाले काल हैं — रोज़ के काम के लिए डरने का कारण नहीं।

चौघड़िया

दिन

  • लाभ(शुभ)07:09 – 08:33
  • अमृत(शुभ)08:33 – 09:57
  • काल(वर्जित (परंपरा))09:57 – 11:21
  • शुभ(शुभ)11:21 – 12:45
  • रोग(वर्जित (परंपरा))12:45 – 14:09
  • उद्वेग(वर्जित (परंपरा))14:09 – 15:32
  • चर(सामान्य)15:32 – 16:56
  • लाभ(शुभ)16:56 – 18:20

रात

  • उद्वेग(वर्जित (परंपरा))18:20 – 19:56
  • शुभ(शुभ)19:56 – 21:32
  • अमृत(शुभ)21:32 – 23:09
  • चर(सामान्य)23:09 – 00:45 (20 जन॰)
  • रोग(वर्जित (परंपरा))00:45 (20 जन॰) – 02:21 (20 जन॰)
  • काल(वर्जित (परंपरा))02:21 (20 जन॰) – 03:57 (20 जन॰)
  • लाभ(शुभ)03:57 (20 जन॰) – 05:33 (20 जन॰)
  • उद्वेग(वर्जित (परंपरा))05:33 (20 जन॰) – 07:09 (20 जन॰)

पुस्तक: पंचांग स्थान, सूर्योदय, समय-क्षेत्र और अयनांश पर निर्भर है — संस्कार, पर्व या मुहूर्त के लिए प्रकाशित स्थानीय पंचांग से समय सत्यापित करें।

निरयन लाहिड़ी अयनांश; सूर्योदय-सूर्यास्त सूर्य-बिंब के ऊपरी किनारे से, वायुमंडलीय अपवर्तन सहित। प्रकाशित पंचांगों से 1–2 मिनट का अंतर संभव।

पुस्तक में:अध्याय 3 · जन्म-विवरण से कुंडली कैसे बनती है · पृष्ठ 22

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