पंचांग 15 फ़रवरी 2067
तिथि और स्थान चुनें — सूर्योदय से अगले सूर्योदय तक तिथि, नक्षत्र, योग, करण, राहु काल और चौघड़िया। गणना आपके फ़ोन पर ही होती है।
स्थान
तिथि (तारीख)
15 फ़रवरी 2067 · मंगलवार
पुणे — Pune, Maharashtra · समय इस स्थान के समय-क्षेत्र में (Asia/Kolkata)
इस महीने का पंचांग (कैलेंडर) सूर्योदय07:02
सूर्यास्त18:35
चंद्रोदय07:46
चंद्रास्त20:09
- मास:
- फाल्गुन (अमांत)
- संवत:
- शक 1988 · विक्रम (चैत्रादि) 2123
- संवत्सर:
- व्यय (शक-आधारित, महाराष्ट्र/दक्षिण परंपरा)
- ऋतु · अयन:
- शिशिर · उत्तरायण
- सूर्य राशि:
- कुंभ
- चंद्र राशि:
- कुंभ 03:14 (16 फ़र॰) तक, फिर मीन
पंचांग के अंग — सूर्योदय से अगले सूर्योदय तक
- वार
- मंगलवार
- तिथि
- शुक्ल द्वितीया 21:00 तक, फिर शुक्ल तृतीया 18:30 (16 फ़र॰) तक
- नक्षत्र
- शतभिषा 10:50 तक, फिर पूर्वाभाद्रपदा 08:47 (16 फ़र॰) तक
- योग
- शिव 18:17 तक, फिर सिद्ध 14:57 (16 फ़र॰) तक
- करण
- बालव 10:28 तक, फिर कौलव 21:00 तक, फिर तैतिल 07:40 (16 फ़र॰) तक
मुहूर्त-काल
- अभिजित मुहूर्त12:25 – 13:11
- राहु काल15:41 – 17:08
- यमगंड09:55 – 11:22
- गुलिक काल12:48 – 14:15
राहु काल, यमगंड और गुलिक परंपरा में नए शुभ कार्य के आरंभ के लिए टाले जाने वाले काल हैं — रोज़ के काम के लिए डरने का कारण नहीं।
चौघड़िया
दिन
- रोग(वर्जित (परंपरा))07:02 – 08:28
- उद्वेग(वर्जित (परंपरा))08:28 – 09:55
- चर(सामान्य)09:55 – 11:22
- लाभ(शुभ)11:22 – 12:48
- अमृत(शुभ)12:48 – 14:15
- काल(वर्जित (परंपरा))14:15 – 15:41
- शुभ(शुभ)15:41 – 17:08
- रोग(वर्जित (परंपरा))17:08 – 18:35
रात
- काल(वर्जित (परंपरा))18:35 – 20:08
- लाभ(शुभ)20:08 – 21:41
- उद्वेग(वर्जित (परंपरा))21:41 – 23:15
- शुभ(शुभ)23:15 – 00:48 (16 फ़र॰)
- अमृत(शुभ)00:48 (16 फ़र॰) – 02:21 (16 फ़र॰)
- चर(सामान्य)02:21 (16 फ़र॰) – 03:55 (16 फ़र॰)
- रोग(वर्जित (परंपरा))03:55 (16 फ़र॰) – 05:28 (16 फ़र॰)
- काल(वर्जित (परंपरा))05:28 (16 फ़र॰) – 07:01 (16 फ़र॰)
पुस्तक: पंचांग स्थान, सूर्योदय, समय-क्षेत्र और अयनांश पर निर्भर है — संस्कार, पर्व या मुहूर्त के लिए प्रकाशित स्थानीय पंचांग से समय सत्यापित करें।
निरयन लाहिड़ी अयनांश; सूर्योदय-सूर्यास्त सूर्य-बिंब के ऊपरी किनारे से, वायुमंडलीय अपवर्तन सहित। प्रकाशित पंचांगों से 1–2 मिनट का अंतर संभव।
पुस्तक में:अध्याय 3 · जन्म-विवरण से कुंडली कैसे बनती है · पृष्ठ 22
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