पंचांग 26 मार्च 2067

तिथि और स्थान चुनें — सूर्योदय से अगले सूर्योदय तक तिथि, नक्षत्र, योग, करण, राहु काल और चौघड़िया। गणना आपके फ़ोन पर ही होती है।

स्थान
तिथि (तारीख)

26 मार्च 2067 · शनिवार

पुणे — Pune, Maharashtra · समय इस स्थान के समय-क्षेत्र में (Asia/Kolkata)

इस महीने का पंचांग (कैलेंडर)
सूर्योदय06:33
सूर्यास्त18:46
चंद्रोदय15:07
चंद्रास्त04:00 (27 मार्च)
मास:
अधिक चैत्र (अमांत)
संवत:
शक 1989 · विक्रम (चैत्रादि) 2124
संवत्सर:
सर्वजित (शक-आधारित, महाराष्ट्र/दक्षिण परंपरा)
ऋतु · अयन:
वसंत · उत्तरायण
सूर्य राशि:
मीन
चंद्र राशि:
कर्क

पंचांग के अंग — सूर्योदय से अगले सूर्योदय तक

वार
शनिवार
तिथि
शुक्ल एकादशी 21:01 तक, फिर शुक्ल द्वादशी 22:58 (27 मार्च) तक
नक्षत्र
पुष्य 07:47 तक, फिर आश्लेषा 10:27 (27 मार्च) तक
योग
सुकर्मा 18:49 तक, फिर धृति 19:20 (27 मार्च) तक
करण
वणिज 07:53 तक, फिर विष्टि 21:01 तक, फिर बव 10:03 (27 मार्च) तक

मुहूर्त-काल

  • अभिजित मुहूर्त12:15 – 13:04
  • राहु काल09:37 – 11:08
  • यमगंड14:12 – 15:43
  • गुलिक काल06:33 – 08:05

राहु काल, यमगंड और गुलिक परंपरा में नए शुभ कार्य के आरंभ के लिए टाले जाने वाले काल हैं — रोज़ के काम के लिए डरने का कारण नहीं।

चौघड़िया

दिन

  • काल(वर्जित (परंपरा))06:33 – 08:05
  • शुभ(शुभ)08:05 – 09:37
  • रोग(वर्जित (परंपरा))09:37 – 11:08
  • उद्वेग(वर्जित (परंपरा))11:08 – 12:40
  • चर(सामान्य)12:40 – 14:12
  • लाभ(शुभ)14:12 – 15:43
  • अमृत(शुभ)15:43 – 17:15
  • काल(वर्जित (परंपरा))17:15 – 18:46

रात

  • लाभ(शुभ)18:46 – 20:15
  • उद्वेग(वर्जित (परंपरा))20:15 – 21:43
  • शुभ(शुभ)21:43 – 23:11
  • अमृत(शुभ)23:11 – 00:39 (27 मार्च)
  • चर(सामान्य)00:39 (27 मार्च) – 02:08 (27 मार्च)
  • रोग(वर्जित (परंपरा))02:08 (27 मार्च) – 03:36 (27 मार्च)
  • काल(वर्जित (परंपरा))03:36 (27 मार्च) – 05:04 (27 मार्च)
  • लाभ(शुभ)05:04 (27 मार्च) – 06:33 (27 मार्च)

पुस्तक: पंचांग स्थान, सूर्योदय, समय-क्षेत्र और अयनांश पर निर्भर है — संस्कार, पर्व या मुहूर्त के लिए प्रकाशित स्थानीय पंचांग से समय सत्यापित करें।

निरयन लाहिड़ी अयनांश; सूर्योदय-सूर्यास्त सूर्य-बिंब के ऊपरी किनारे से, वायुमंडलीय अपवर्तन सहित। प्रकाशित पंचांगों से 1–2 मिनट का अंतर संभव।

पुस्तक में:अध्याय 3 · जन्म-विवरण से कुंडली कैसे बनती है · पृष्ठ 22

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