पंचांग 31 मार्च 2067
तिथि और स्थान चुनें — सूर्योदय से अगले सूर्योदय तक तिथि, नक्षत्र, योग, करण, राहु काल और चौघड़िया। गणना आपके फ़ोन पर ही होती है।
स्थान
तिथि (तारीख)
31 मार्च 2067 · गुरुवार
पुणे — Pune, Maharashtra · समय इस स्थान के समय-क्षेत्र में (Asia/Kolkata)
इस महीने का पंचांग (कैलेंडर) सूर्योदय06:29
सूर्यास्त18:48
चंद्रोदय19:21
चंद्रास्तनहीं
- मास:
- अधिक चैत्र (अमांत) · वैशाख (पूर्णिमांत)
- संवत:
- शक 1989 · विक्रम (चैत्रादि) 2124
- संवत्सर:
- सर्वजित (शक-आधारित, महाराष्ट्र/दक्षिण परंपरा)
- ऋतु · अयन:
- वसंत · उत्तरायण
- सूर्य राशि:
- मीन
- चंद्र राशि:
- कन्या 04:27 (1 अप्रैल) तक, फिर तुला
पंचांग के अंग — सूर्योदय से अगले सूर्योदय तक
- वार
- गुरुवार
- तिथि
- कृष्ण प्रतिपदा 01:31 (1 अप्रैल) तक, फिर कृष्ण द्वितीया 00:59 (2 अप्रैल) तक
- नक्षत्र
- हस्त 16:15 तक, फिर चित्रा 16:32 (1 अप्रैल) तक
- योग
- ध्रुव 17:23 तक, फिर व्याघात 15:58 (1 अप्रैल) तक
- करण
- बालव 13:37 तक, फिर कौलव 01:31 (1 अप्रैल) तक, फिर तैतिल 13:18 (1 अप्रैल) तक
मुहूर्त-काल
- अभिजित मुहूर्त12:14 – 13:03
- राहु काल14:11 – 15:43
- यमगंड06:29 – 08:02
- गुलिक काल09:34 – 11:06
राहु काल, यमगंड और गुलिक परंपरा में नए शुभ कार्य के आरंभ के लिए टाले जाने वाले काल हैं — रोज़ के काम के लिए डरने का कारण नहीं।
चौघड़िया
दिन
- शुभ(शुभ)06:29 – 08:02
- रोग(वर्जित (परंपरा))08:02 – 09:34
- उद्वेग(वर्जित (परंपरा))09:34 – 11:06
- चर(सामान्य)11:06 – 12:38
- लाभ(शुभ)12:38 – 14:11
- अमृत(शुभ)14:11 – 15:43
- काल(वर्जित (परंपरा))15:43 – 17:15
- शुभ(शुभ)17:15 – 18:48
रात
- अमृत(शुभ)18:48 – 20:15
- चर(सामान्य)20:15 – 21:43
- रोग(वर्जित (परंपरा))21:43 – 23:10
- काल(वर्जित (परंपरा))23:10 – 00:38 (1 अप्रैल)
- लाभ(शुभ)00:38 (1 अप्रैल) – 02:06 (1 अप्रैल)
- उद्वेग(वर्जित (परंपरा))02:06 (1 अप्रैल) – 03:33 (1 अप्रैल)
- शुभ(शुभ)03:33 (1 अप्रैल) – 05:01 (1 अप्रैल)
- अमृत(शुभ)05:01 (1 अप्रैल) – 06:28 (1 अप्रैल)
पुस्तक: पंचांग स्थान, सूर्योदय, समय-क्षेत्र और अयनांश पर निर्भर है — संस्कार, पर्व या मुहूर्त के लिए प्रकाशित स्थानीय पंचांग से समय सत्यापित करें।
निरयन लाहिड़ी अयनांश; सूर्योदय-सूर्यास्त सूर्य-बिंब के ऊपरी किनारे से, वायुमंडलीय अपवर्तन सहित। प्रकाशित पंचांगों से 1–2 मिनट का अंतर संभव।
पुस्तक में:अध्याय 3 · जन्म-विवरण से कुंडली कैसे बनती है · पृष्ठ 22
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