पंचांग 22 अगस्त 2067

तिथि और स्थान चुनें — सूर्योदय से अगले सूर्योदय तक तिथि, नक्षत्र, योग, करण, राहु काल और चौघड़िया। गणना आपके फ़ोन पर ही होती है।

स्थान
तिथि (तारीख)

22 अगस्त 2067 · सोमवार

पुणे — Pune, Maharashtra · समय इस स्थान के समय-क्षेत्र में (Asia/Kolkata)

इस महीने का पंचांग (कैलेंडर)
सूर्योदय06:18
सूर्यास्त18:56
चंद्रोदय16:52
चंद्रास्त04:33 (23 अग॰)
मास:
श्रावण (अमांत)
संवत:
शक 1989 · विक्रम (चैत्रादि) 2124
संवत्सर:
सर्वजित (शक-आधारित, महाराष्ट्र/दक्षिण परंपरा)
ऋतु · अयन:
वर्षा · दक्षिणायन
सूर्य राशि:
सिंह
चंद्र राशि:
धनु 12:14 तक, फिर मकर

पंचांग के अंग — सूर्योदय से अगले सूर्योदय तक

वार
सोमवार
तिथि
शुक्ल द्वादशी 09:39 तक, फिर शुक्ल त्रयोदशी 06:07 (23 अग॰) तक, फिर शुक्ल चतुर्दशी 02:20 (24 अग॰) तक
नक्षत्र
पूर्वाषाढ़ा 06:52 तक, फिर उत्तराषाढ़ा 04:12 (23 अग॰) तक, फिर श्रवण 01:15 (24 अग॰) तक
योग
आयुष्मान 20:31 तक, फिर सौभाग्य 16:24 (23 अग॰) तक
करण
बालव 09:39 तक, फिर कौलव 19:55 तक, फिर तैतिल 06:07 (23 अग॰) तक, फिर गर 16:15 (23 अग॰) तक

मुहूर्त-काल

  • अभिजित मुहूर्त12:12 – 13:02
  • राहु काल07:52 – 09:27
  • यमगंड11:02 – 12:37
  • गुलिक काल14:12 – 15:47

राहु काल, यमगंड और गुलिक परंपरा में नए शुभ कार्य के आरंभ के लिए टाले जाने वाले काल हैं — रोज़ के काम के लिए डरने का कारण नहीं।

चौघड़िया

दिन

  • अमृत(शुभ)06:18 – 07:52
  • काल(वर्जित (परंपरा))07:52 – 09:27
  • शुभ(शुभ)09:27 – 11:02
  • रोग(वर्जित (परंपरा))11:02 – 12:37
  • उद्वेग(वर्जित (परंपरा))12:37 – 14:12
  • चर(सामान्य)14:12 – 15:47
  • लाभ(शुभ)15:47 – 17:22
  • अमृत(शुभ)17:22 – 18:56

रात

  • चर(सामान्य)18:56 – 20:22
  • रोग(वर्जित (परंपरा))20:22 – 21:47
  • काल(वर्जित (परंपरा))21:47 – 23:12
  • लाभ(शुभ)23:12 – 00:37 (23 अग॰)
  • उद्वेग(वर्जित (परंपरा))00:37 (23 अग॰) – 02:02 (23 अग॰)
  • शुभ(शुभ)02:02 (23 अग॰) – 03:27 (23 अग॰)
  • अमृत(शुभ)03:27 (23 अग॰) – 04:53 (23 अग॰)
  • चर(सामान्य)04:53 (23 अग॰) – 06:18 (23 अग॰)

पुस्तक: पंचांग स्थान, सूर्योदय, समय-क्षेत्र और अयनांश पर निर्भर है — संस्कार, पर्व या मुहूर्त के लिए प्रकाशित स्थानीय पंचांग से समय सत्यापित करें।

निरयन लाहिड़ी अयनांश; सूर्योदय-सूर्यास्त सूर्य-बिंब के ऊपरी किनारे से, वायुमंडलीय अपवर्तन सहित। प्रकाशित पंचांगों से 1–2 मिनट का अंतर संभव।

पुस्तक में:अध्याय 3 · जन्म-विवरण से कुंडली कैसे बनती है · पृष्ठ 22

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