पंचांग 6 सितंबर 2067
तिथि और स्थान चुनें — सूर्योदय से अगले सूर्योदय तक तिथि, नक्षत्र, योग, करण, राहु काल और चौघड़िया। गणना आपके फ़ोन पर ही होती है।
स्थान
तिथि (तारीख)
6 सितंबर 2067 · मंगलवार
पुणे — Pune, Maharashtra · समय इस स्थान के समय-क्षेत्र में (Asia/Kolkata)
इस महीने का पंचांग (कैलेंडर) सूर्योदय06:20
सूर्यास्त18:44
चंद्रोदय05:01 (7 सित॰)
चंद्रास्त17:06
- मास:
- श्रावण (अमांत) · भाद्रपद (पूर्णिमांत)
- संवत:
- शक 1989 · विक्रम (चैत्रादि) 2124
- संवत्सर:
- सर्वजित (शक-आधारित, महाराष्ट्र/दक्षिण परंपरा)
- ऋतु · अयन:
- वर्षा · दक्षिणायन
- सूर्य राशि:
- सिंह
- चंद्र राशि:
- कर्क 04:46 (7 सित॰) तक, फिर सिंह
पंचांग के अंग — सूर्योदय से अगले सूर्योदय तक
- वार
- मंगलवार
- तिथि
- कृष्ण त्रयोदशी 19:12 तक, फिर कृष्ण चतुर्दशी 21:32 (7 सित॰) तक
- नक्षत्र
- आश्लेषा 04:46 (7 सित॰) तक, फिर मघा 07:34 (8 सित॰) तक
- योग
- परिघ 16:58 तक, फिर शिव 17:50 (7 सित॰) तक
- करण
- वणिज 19:12 तक, फिर विष्टि 08:23 (7 सित॰) तक
मुहूर्त-काल
- अभिजित मुहूर्त12:08 – 12:57
- राहु काल15:38 – 17:11
- यमगंड09:26 – 10:59
- गुलिक काल12:32 – 14:05
राहु काल, यमगंड और गुलिक परंपरा में नए शुभ कार्य के आरंभ के लिए टाले जाने वाले काल हैं — रोज़ के काम के लिए डरने का कारण नहीं।
चौघड़िया
दिन
- रोग(वर्जित (परंपरा))06:20 – 07:53
- उद्वेग(वर्जित (परंपरा))07:53 – 09:26
- चर(सामान्य)09:26 – 10:59
- लाभ(शुभ)10:59 – 12:32
- अमृत(शुभ)12:32 – 14:05
- काल(वर्जित (परंपरा))14:05 – 15:38
- शुभ(शुभ)15:38 – 17:11
- रोग(वर्जित (परंपरा))17:11 – 18:44
रात
- काल(वर्जित (परंपरा))18:44 – 20:11
- लाभ(शुभ)20:11 – 21:38
- उद्वेग(वर्जित (परंपरा))21:38 – 23:05
- शुभ(शुभ)23:05 – 00:32 (7 सित॰)
- अमृत(शुभ)00:32 (7 सित॰) – 01:59 (7 सित॰)
- चर(सामान्य)01:59 (7 सित॰) – 03:26 (7 सित॰)
- रोग(वर्जित (परंपरा))03:26 (7 सित॰) – 04:54 (7 सित॰)
- काल(वर्जित (परंपरा))04:54 (7 सित॰) – 06:21 (7 सित॰)
पुस्तक: पंचांग स्थान, सूर्योदय, समय-क्षेत्र और अयनांश पर निर्भर है — संस्कार, पर्व या मुहूर्त के लिए प्रकाशित स्थानीय पंचांग से समय सत्यापित करें।
निरयन लाहिड़ी अयनांश; सूर्योदय-सूर्यास्त सूर्य-बिंब के ऊपरी किनारे से, वायुमंडलीय अपवर्तन सहित। प्रकाशित पंचांगों से 1–2 मिनट का अंतर संभव।
पुस्तक में:अध्याय 3 · जन्म-विवरण से कुंडली कैसे बनती है · पृष्ठ 22
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