पंचांग 10 दिसंबर 2067

तिथि और स्थान चुनें — सूर्योदय से अगले सूर्योदय तक तिथि, नक्षत्र, योग, करण, राहु काल और चौघड़िया। गणना आपके फ़ोन पर ही होती है।

स्थान
तिथि (तारीख)

10 दिसंबर 2067 · शनिवार

पुणे — Pune, Maharashtra · समय इस स्थान के समय-क्षेत्र में (Asia/Kolkata)

इस महीने का पंचांग (कैलेंडर)
सूर्योदय06:55
सूर्यास्त17:58
चंद्रोदय10:08
चंद्रास्त21:56
मास:
मार्गशीर्ष (अमांत)
संवत:
शक 1989 · विक्रम (चैत्रादि) 2124
संवत्सर:
सर्वजित (शक-आधारित, महाराष्ट्र/दक्षिण परंपरा)
ऋतु · अयन:
हेमंत · दक्षिणायन
सूर्य राशि:
वृश्चिक
चंद्र राशि:
मकर

पंचांग के अंग — सूर्योदय से अगले सूर्योदय तक

वार
शनिवार
तिथि
शुक्ल चतुर्थी 10:23 तक, फिर शुक्ल पंचमी 07:50 (11 दिस॰) तक
नक्षत्र
उत्तराषाढ़ा 08:06 तक, फिर श्रवण 06:15 (11 दिस॰) तक, फिर धनिष्ठा 04:31 (12 दिस॰) तक
योग
ध्रुव 18:32 तक, फिर व्याघात 15:16 (11 दिस॰) तक
करण
विष्टि 10:23 तक, फिर बव 21:06 तक, फिर बालव 07:50 (11 दिस॰) तक

मुहूर्त-काल

  • अभिजित मुहूर्त12:05 – 12:49
  • राहु काल09:41 – 11:04
  • यमगंड13:49 – 15:12
  • गुलिक काल06:55 – 08:18

राहु काल, यमगंड और गुलिक परंपरा में नए शुभ कार्य के आरंभ के लिए टाले जाने वाले काल हैं — रोज़ के काम के लिए डरने का कारण नहीं।

चौघड़िया

दिन

  • काल(वर्जित (परंपरा))06:55 – 08:18
  • शुभ(शुभ)08:18 – 09:41
  • रोग(वर्जित (परंपरा))09:41 – 11:04
  • उद्वेग(वर्जित (परंपरा))11:04 – 12:27
  • चर(सामान्य)12:27 – 13:49
  • लाभ(शुभ)13:49 – 15:12
  • अमृत(शुभ)15:12 – 16:35
  • काल(वर्जित (परंपरा))16:35 – 17:58

रात

  • लाभ(शुभ)17:58 – 19:35
  • उद्वेग(वर्जित (परंपरा))19:35 – 21:12
  • शुभ(शुभ)21:12 – 22:50
  • अमृत(शुभ)22:50 – 00:27 (11 दिस॰)
  • चर(सामान्य)00:27 (11 दिस॰) – 02:04 (11 दिस॰)
  • रोग(वर्जित (परंपरा))02:04 (11 दिस॰) – 03:41 (11 दिस॰)
  • काल(वर्जित (परंपरा))03:41 (11 दिस॰) – 05:19 (11 दिस॰)
  • लाभ(शुभ)05:19 (11 दिस॰) – 06:56 (11 दिस॰)

पुस्तक: पंचांग स्थान, सूर्योदय, समय-क्षेत्र और अयनांश पर निर्भर है — संस्कार, पर्व या मुहूर्त के लिए प्रकाशित स्थानीय पंचांग से समय सत्यापित करें।

निरयन लाहिड़ी अयनांश; सूर्योदय-सूर्यास्त सूर्य-बिंब के ऊपरी किनारे से, वायुमंडलीय अपवर्तन सहित। प्रकाशित पंचांगों से 1–2 मिनट का अंतर संभव।

पुस्तक में:अध्याय 3 · जन्म-विवरण से कुंडली कैसे बनती है · पृष्ठ 22

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