पंचांग 11 अक्टूबर 2068

तिथि और स्थान चुनें — सूर्योदय से अगले सूर्योदय तक तिथि, नक्षत्र, योग, करण, राहु काल और चौघड़िया। गणना आपके फ़ोन पर ही होती है।

स्थान
तिथि (तारीख)

11 अक्टूबर 2068 · गुरुवार

पुणे — Pune, Maharashtra · समय इस स्थान के समय-क्षेत्र में (Asia/Kolkata)

इस महीने का पंचांग (कैलेंडर)
सूर्योदय06:27
सूर्यास्त18:14
चंद्रोदय18:26
चंद्रास्त06:27
मास:
आश्विन (अमांत)
संवत:
शक 1990 · विक्रम (चैत्रादि) 2125
संवत्सर:
सर्वधारी (शक-आधारित, महाराष्ट्र/दक्षिण परंपरा)
ऋतु · अयन:
शरद · दक्षिणायन
सूर्य राशि:
कन्या
चंद्र राशि:
मीन 17:01 तक, फिर मेष

पंचांग के अंग — सूर्योदय से अगले सूर्योदय तक

वार
गुरुवार
तिथि
शुक्ल पूर्णिमा 07:09 तक, फिर कृष्ण प्रतिपदा 03:31 (12 अक्टू॰) तक, फिर कृष्ण द्वितीया 00:13 (13 अक्टू॰) तक
नक्षत्र
रेवती 17:01 तक, फिर अश्विनी 14:19 (12 अक्टू॰) तक
योग
व्याघात 15:47 तक, फिर हर्षण 11:44 (12 अक्टू॰) तक
करण
बव 07:09 तक, फिर बालव 17:18 तक, फिर कौलव 03:31 (12 अक्टू॰) तक, फिर तैतिल 13:49 (12 अक्टू॰) तक

मुहूर्त-काल

  • अभिजित मुहूर्त11:57 – 12:44
  • राहु काल13:49 – 15:17
  • यमगंड06:27 – 07:55
  • गुलिक काल09:24 – 10:52

राहु काल, यमगंड और गुलिक परंपरा में नए शुभ कार्य के आरंभ के लिए टाले जाने वाले काल हैं — रोज़ के काम के लिए डरने का कारण नहीं।

चौघड़िया

दिन

  • शुभ(शुभ)06:27 – 07:55
  • रोग(वर्जित (परंपरा))07:55 – 09:24
  • उद्वेग(वर्जित (परंपरा))09:24 – 10:52
  • चर(सामान्य)10:52 – 12:21
  • लाभ(शुभ)12:21 – 13:49
  • अमृत(शुभ)13:49 – 15:17
  • काल(वर्जित (परंपरा))15:17 – 16:46
  • शुभ(शुभ)16:46 – 18:14

रात

  • अमृत(शुभ)18:14 – 19:46
  • चर(सामान्य)19:46 – 21:17
  • रोग(वर्जित (परंपरा))21:17 – 22:49
  • काल(वर्जित (परंपरा))22:49 – 00:21 (12 अक्टू॰)
  • लाभ(शुभ)00:21 (12 अक्टू॰) – 01:52 (12 अक्टू॰)
  • उद्वेग(वर्जित (परंपरा))01:52 (12 अक्टू॰) – 03:24 (12 अक्टू॰)
  • शुभ(शुभ)03:24 (12 अक्टू॰) – 04:56 (12 अक्टू॰)
  • अमृत(शुभ)04:56 (12 अक्टू॰) – 06:27 (12 अक्टू॰)

पुस्तक: पंचांग स्थान, सूर्योदय, समय-क्षेत्र और अयनांश पर निर्भर है — संस्कार, पर्व या मुहूर्त के लिए प्रकाशित स्थानीय पंचांग से समय सत्यापित करें।

निरयन लाहिड़ी अयनांश; सूर्योदय-सूर्यास्त सूर्य-बिंब के ऊपरी किनारे से, वायुमंडलीय अपवर्तन सहित। प्रकाशित पंचांगों से 1–2 मिनट का अंतर संभव।

पुस्तक में:अध्याय 3 · जन्म-विवरण से कुंडली कैसे बनती है · पृष्ठ 22

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