पंचांग 22 अक्टूबर 2068

तिथि और स्थान चुनें — सूर्योदय से अगले सूर्योदय तक तिथि, नक्षत्र, योग, करण, राहु काल और चौघड़िया। गणना आपके फ़ोन पर ही होती है।

स्थान
तिथि (तारीख)

22 अक्टूबर 2068 · सोमवार

पुणे — Pune, Maharashtra · समय इस स्थान के समय-क्षेत्र में (Asia/Kolkata)

इस महीने का पंचांग (कैलेंडर)
सूर्योदय06:30
सूर्यास्त18:06
चंद्रोदय04:03 (23 अक्टू॰)
चंद्रास्त15:39
मास:
आश्विन (अमांत) · कार्तिक (पूर्णिमांत)
संवत:
शक 1990 · विक्रम (चैत्रादि) 2125
संवत्सर:
सर्वधारी (शक-आधारित, महाराष्ट्र/दक्षिण परंपरा)
ऋतु · अयन:
शरद · दक्षिणायन
सूर्य राशि:
तुला
चंद्र राशि:
सिंह 03:31 (23 अक्टू॰) तक, फिर कन्या

पंचांग के अंग — सूर्योदय से अगले सूर्योदय तक

वार
सोमवार
तिथि
कृष्ण द्वादशी 02:26 (23 अक्टू॰) तक, फिर कृष्ण त्रयोदशी 05:00 (24 अक्टू॰) तक
नक्षत्र
पूर्वाफाल्गुनी 20:45 तक, फिर उत्तराफाल्गुनी 23:48 (23 अक्टू॰) तक
योग
ब्रह्म 23:26 तक, फिर इन्द्र 00:23 (24 अक्टू॰) तक
करण
कौलव 13:10 तक, फिर तैतिल 02:26 (23 अक्टू॰) तक, फिर गर 15:44 (23 अक्टू॰) तक

मुहूर्त-काल

  • अभिजित मुहूर्त11:55 – 12:42
  • राहु काल07:57 – 09:24
  • यमगंड10:51 – 12:18
  • गुलिक काल13:45 – 15:12

राहु काल, यमगंड और गुलिक परंपरा में नए शुभ कार्य के आरंभ के लिए टाले जाने वाले काल हैं — रोज़ के काम के लिए डरने का कारण नहीं।

चौघड़िया

दिन

  • अमृत(शुभ)06:30 – 07:57
  • काल(वर्जित (परंपरा))07:57 – 09:24
  • शुभ(शुभ)09:24 – 10:51
  • रोग(वर्जित (परंपरा))10:51 – 12:18
  • उद्वेग(वर्जित (परंपरा))12:18 – 13:45
  • चर(सामान्य)13:45 – 15:12
  • लाभ(शुभ)15:12 – 16:39
  • अमृत(शुभ)16:39 – 18:06

रात

  • चर(सामान्य)18:06 – 19:39
  • रोग(वर्जित (परंपरा))19:39 – 21:12
  • काल(वर्जित (परंपरा))21:12 – 22:45
  • लाभ(शुभ)22:45 – 00:18 (23 अक्टू॰)
  • उद्वेग(वर्जित (परंपरा))00:18 (23 अक्टू॰) – 01:51 (23 अक्टू॰)
  • शुभ(शुभ)01:51 (23 अक्टू॰) – 03:25 (23 अक्टू॰)
  • अमृत(शुभ)03:25 (23 अक्टू॰) – 04:58 (23 अक्टू॰)
  • चर(सामान्य)04:58 (23 अक्टू॰) – 06:31 (23 अक्टू॰)

पुस्तक: पंचांग स्थान, सूर्योदय, समय-क्षेत्र और अयनांश पर निर्भर है — संस्कार, पर्व या मुहूर्त के लिए प्रकाशित स्थानीय पंचांग से समय सत्यापित करें।

निरयन लाहिड़ी अयनांश; सूर्योदय-सूर्यास्त सूर्य-बिंब के ऊपरी किनारे से, वायुमंडलीय अपवर्तन सहित। प्रकाशित पंचांगों से 1–2 मिनट का अंतर संभव।

पुस्तक में:अध्याय 3 · जन्म-विवरण से कुंडली कैसे बनती है · पृष्ठ 22

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