पंचांग 7 दिसंबर 2068

तिथि और स्थान चुनें — सूर्योदय से अगले सूर्योदय तक तिथि, नक्षत्र, योग, करण, राहु काल और चौघड़िया। गणना आपके फ़ोन पर ही होती है।

स्थान
तिथि (तारीख)

7 दिसंबर 2068 · शुक्रवार

पुणे — Pune, Maharashtra · समय इस स्थान के समय-क्षेत्र में (Asia/Kolkata)

इस महीने का पंचांग (कैलेंडर)
सूर्योदय06:54
सूर्यास्त17:57
चंद्रोदय16:35
चंद्रास्त06:00 (8 दिस॰)
मास:
मार्गशीर्ष (अमांत)
संवत:
शक 1990 · विक्रम (चैत्रादि) 2125
संवत्सर:
सर्वधारी (शक-आधारित, महाराष्ट्र/दक्षिण परंपरा)
ऋतु · अयन:
हेमंत · दक्षिणायन
सूर्य राशि:
वृश्चिक
चंद्र राशि:
मेष 14:35 तक, फिर वृषभ

पंचांग के अंग — सूर्योदय से अगले सूर्योदय तक

वार
शुक्रवार
तिथि
शुक्ल त्रयोदशी 09:40 तक, फिर शुक्ल चतुर्दशी 07:17 (8 दिस॰) तक
नक्षत्र
भरणी 09:01 तक, फिर कृत्तिका 07:21 (8 दिस॰) तक
योग
शिव 23:02 तक, फिर सिद्ध 20:00 (8 दिस॰) तक
करण
तैतिल 09:40 तक, फिर गर 20:27 तक, फिर वणिज 07:17 (8 दिस॰) तक

मुहूर्त-काल

  • अभिजित मुहूर्त12:04 – 12:48
  • राहु काल11:03 – 12:26
  • यमगंड15:12 – 16:34
  • गुलिक काल08:17 – 09:40

राहु काल, यमगंड और गुलिक परंपरा में नए शुभ कार्य के आरंभ के लिए टाले जाने वाले काल हैं — रोज़ के काम के लिए डरने का कारण नहीं।

चौघड़िया

दिन

  • चर(सामान्य)06:54 – 08:17
  • लाभ(शुभ)08:17 – 09:40
  • अमृत(शुभ)09:40 – 11:03
  • काल(वर्जित (परंपरा))11:03 – 12:26
  • शुभ(शुभ)12:26 – 13:49
  • रोग(वर्जित (परंपरा))13:49 – 15:12
  • उद्वेग(वर्जित (परंपरा))15:12 – 16:34
  • चर(सामान्य)16:34 – 17:57

रात

  • रोग(वर्जित (परंपरा))17:57 – 19:35
  • काल(वर्जित (परंपरा))19:35 – 21:12
  • लाभ(शुभ)21:12 – 22:49
  • उद्वेग(वर्जित (परंपरा))22:49 – 00:26 (8 दिस॰)
  • शुभ(शुभ)00:26 (8 दिस॰) – 02:03 (8 दिस॰)
  • अमृत(शुभ)02:03 (8 दिस॰) – 03:40 (8 दिस॰)
  • चर(सामान्य)03:40 (8 दिस॰) – 05:17 (8 दिस॰)
  • रोग(वर्जित (परंपरा))05:17 (8 दिस॰) – 06:55 (8 दिस॰)

पुस्तक: पंचांग स्थान, सूर्योदय, समय-क्षेत्र और अयनांश पर निर्भर है — संस्कार, पर्व या मुहूर्त के लिए प्रकाशित स्थानीय पंचांग से समय सत्यापित करें।

निरयन लाहिड़ी अयनांश; सूर्योदय-सूर्यास्त सूर्य-बिंब के ऊपरी किनारे से, वायुमंडलीय अपवर्तन सहित। प्रकाशित पंचांगों से 1–2 मिनट का अंतर संभव।

पुस्तक में:अध्याय 3 · जन्म-विवरण से कुंडली कैसे बनती है · पृष्ठ 22

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