पंचांग 21 अप्रैल 2069
तिथि और स्थान चुनें — सूर्योदय से अगले सूर्योदय तक तिथि, नक्षत्र, योग, करण, राहु काल और चौघड़िया। गणना आपके फ़ोन पर ही होती है।
स्थान
तिथि (तारीख)
21 अप्रैल 2069 · रविवार
पुणे — Pune, Maharashtra · समय इस स्थान के समय-क्षेत्र में (Asia/Kolkata)
इस महीने का पंचांग (कैलेंडर) सूर्योदय06:13
सूर्यास्त18:53
चंद्रोदयनहीं
चंद्रास्त18:57
- मास:
- चैत्र (अमांत) · वैशाख (पूर्णिमांत)
- संवत:
- शक 1991 · विक्रम (चैत्रादि) 2126
- संवत्सर:
- विरोधी (शक-आधारित, महाराष्ट्र/दक्षिण परंपरा)
- ऋतु · अयन:
- वसंत · उत्तरायण
- सूर्य राशि:
- मेष
- चंद्र राशि:
- मेष
पंचांग के अंग — सूर्योदय से अगले सूर्योदय तक
- वार
- रविवार
- तिथि
- कृष्ण अमावस्या 15:28 तक, फिर शुक्ल प्रतिपदा 11:47 (22 अप्रैल) तक
- नक्षत्र
- अश्विनी 01:22 (22 अप्रैल) तक, फिर भरणी 22:35 (22 अप्रैल) तक
- योग
- विष्कम्भ 14:16 तक, फिर प्रीति 10:06 (22 अप्रैल) तक
- करण
- नाग 15:28 तक, फिर किंस्तुघ्न 01:36 (22 अप्रैल) तक, फिर बव 11:47 (22 अप्रैल) तक
मुहूर्त-काल
- अभिजित मुहूर्त12:08 – 12:58
- राहु काल17:18 – 18:53
- यमगंड12:33 – 14:08
- गुलिक काल15:43 – 17:18
राहु काल, यमगंड और गुलिक परंपरा में नए शुभ कार्य के आरंभ के लिए टाले जाने वाले काल हैं — रोज़ के काम के लिए डरने का कारण नहीं।
चौघड़िया
दिन
- उद्वेग(वर्जित (परंपरा))06:13 – 07:48
- चर(सामान्य)07:48 – 09:23
- लाभ(शुभ)09:23 – 10:58
- अमृत(शुभ)10:58 – 12:33
- काल(वर्जित (परंपरा))12:33 – 14:08
- शुभ(शुभ)14:08 – 15:43
- रोग(वर्जित (परंपरा))15:43 – 17:18
- उद्वेग(वर्जित (परंपरा))17:18 – 18:53
रात
- शुभ(शुभ)18:53 – 20:18
- अमृत(शुभ)20:18 – 21:43
- चर(सामान्य)21:43 – 23:08
- रोग(वर्जित (परंपरा))23:08 – 00:33 (22 अप्रैल)
- काल(वर्जित (परंपरा))00:33 (22 अप्रैल) – 01:57 (22 अप्रैल)
- लाभ(शुभ)01:57 (22 अप्रैल) – 03:22 (22 अप्रैल)
- उद्वेग(वर्जित (परंपरा))03:22 (22 अप्रैल) – 04:47 (22 अप्रैल)
- शुभ(शुभ)04:47 (22 अप्रैल) – 06:12 (22 अप्रैल)
पुस्तक: पंचांग स्थान, सूर्योदय, समय-क्षेत्र और अयनांश पर निर्भर है — संस्कार, पर्व या मुहूर्त के लिए प्रकाशित स्थानीय पंचांग से समय सत्यापित करें।
निरयन लाहिड़ी अयनांश; सूर्योदय-सूर्यास्त सूर्य-बिंब के ऊपरी किनारे से, वायुमंडलीय अपवर्तन सहित। प्रकाशित पंचांगों से 1–2 मिनट का अंतर संभव।
पुस्तक में:अध्याय 3 · जन्म-विवरण से कुंडली कैसे बनती है · पृष्ठ 22
अपनी कुंडली देखें