पंचांग 25 अगस्त 1984

तिथि और स्थान चुनें — सूर्योदय से अगले सूर्योदय तक तिथि, नक्षत्र, योग, करण, राहु काल और चौघड़िया। गणना आपके फ़ोन पर ही होती है।

स्थान
तिथि (तारीख)

25 अगस्त 1984 · शनिवार

पुणे — Pune, Maharashtra · समय इस स्थान के समय-क्षेत्र में (Asia/Kolkata)

इस महीने का पंचांग (कैलेंडर)
सूर्योदय06:18
सूर्यास्त18:54
चंद्रोदय05:33 (26 अग॰)
चंद्रास्त18:00
मास:
श्रावण (अमांत) · भाद्रपद (पूर्णिमांत)
संवत:
शक 1906 · विक्रम (चैत्रादि) 2041
संवत्सर:
रक्ताक्षी (शक-आधारित, महाराष्ट्र/दक्षिण परंपरा)
ऋतु · अयन:
वर्षा · दक्षिणायन
सूर्य राशि:
सिंह
चंद्र राशि:
कर्क

पंचांग के अंग — सूर्योदय से अगले सूर्योदय तक

वार
शनिवार
तिथि
कृष्ण त्रयोदशी 07:46 तक, फिर कृष्ण चतुर्दशी 04:31 (26 अग॰) तक, फिर कृष्ण अमावस्या 00:55 (27 अग॰) तक
नक्षत्र
पुष्य 11:26 तक, फिर आश्लेषा 08:55 (26 अग॰) तक
योग
वरीयान 18:41 तक, फिर परिघ 14:45 (26 अग॰) तक
करण
वणिज 07:46 तक, फिर विष्टि 18:12 तक, फिर शकुनि 04:31 (26 अग॰) तक, फिर चतुष्पद 14:45 (26 अग॰) तक

मुहूर्त-काल

  • अभिजित मुहूर्त12:11 – 13:01
  • राहु काल09:27 – 11:01
  • यमगंड14:10 – 15:45
  • गुलिक काल06:18 – 07:52

राहु काल, यमगंड और गुलिक परंपरा में नए शुभ कार्य के आरंभ के लिए टाले जाने वाले काल हैं — रोज़ के काम के लिए डरने का कारण नहीं।

चौघड़िया

दिन

  • काल(वर्जित (परंपरा))06:18 – 07:52
  • शुभ(शुभ)07:52 – 09:27
  • रोग(वर्जित (परंपरा))09:27 – 11:01
  • उद्वेग(वर्जित (परंपरा))11:01 – 12:36
  • चर(सामान्य)12:36 – 14:10
  • लाभ(शुभ)14:10 – 15:45
  • अमृत(शुभ)15:45 – 17:19
  • काल(वर्जित (परंपरा))17:19 – 18:54

रात

  • लाभ(शुभ)18:54 – 20:19
  • उद्वेग(वर्जित (परंपरा))20:19 – 21:45
  • शुभ(शुभ)21:45 – 23:11
  • अमृत(शुभ)23:11 – 00:36 (26 अग॰)
  • चर(सामान्य)00:36 (26 अग॰) – 02:02 (26 अग॰)
  • रोग(वर्जित (परंपरा))02:02 (26 अग॰) – 03:27 (26 अग॰)
  • काल(वर्जित (परंपरा))03:27 (26 अग॰) – 04:53 (26 अग॰)
  • लाभ(शुभ)04:53 (26 अग॰) – 06:18 (26 अग॰)

पुस्तक: पंचांग स्थान, सूर्योदय, समय-क्षेत्र और अयनांश पर निर्भर है — संस्कार, पर्व या मुहूर्त के लिए प्रकाशित स्थानीय पंचांग से समय सत्यापित करें।

निरयन लाहिड़ी अयनांश; सूर्योदय-सूर्यास्त सूर्य-बिंब के ऊपरी किनारे से, वायुमंडलीय अपवर्तन सहित। प्रकाशित पंचांगों से 1–2 मिनट का अंतर संभव।

पुस्तक में:अध्याय 3 · जन्म-विवरण से कुंडली कैसे बनती है · पृष्ठ 22

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