पंचांग 26 अगस्त 1984

तिथि और स्थान चुनें — सूर्योदय से अगले सूर्योदय तक तिथि, नक्षत्र, योग, करण, राहु काल और चौघड़िया। गणना आपके फ़ोन पर ही होती है।

स्थान
तिथि (तारीख)

26 अगस्त 1984 · रविवार

पुणे — Pune, Maharashtra · समय इस स्थान के समय-क्षेत्र में (Asia/Kolkata)

इस महीने का पंचांग (कैलेंडर)
सूर्योदय06:18
सूर्यास्त18:53
चंद्रोदयनहीं
चंद्रास्त18:51
मास:
श्रावण (अमांत) · भाद्रपद (पूर्णिमांत)
संवत:
शक 1906 · विक्रम (चैत्रादि) 2041
संवत्सर:
रक्ताक्षी (शक-आधारित, महाराष्ट्र/दक्षिण परंपरा)
ऋतु · अयन:
वर्षा · दक्षिणायन
सूर्य राशि:
सिंह
चंद्र राशि:
कर्क 08:54 तक, फिर सिंह

पंचांग के अंग — सूर्योदय से अगले सूर्योदय तक

वार
रविवार
तिथि
कृष्ण अमावस्या 00:55 (27 अग॰) तक, फिर शुक्ल प्रतिपदा 21:09 (27 अग॰) तक
नक्षत्र
आश्लेषा 08:55 तक, फिर मघा 06:04 (27 अग॰) तक, फिर पूर्वाफाल्गुनी 03:06 (28 अग॰) तक
योग
परिघ 14:45 तक, फिर शिव 10:36 (27 अग॰) तक
करण
चतुष्पद 14:45 तक, फिर नाग 00:55 (27 अग॰) तक, फिर किंस्तुघ्न 11:02 (27 अग॰) तक

मुहूर्त-काल

  • अभिजित मुहूर्त12:11 – 13:01
  • राहु काल17:19 – 18:53
  • यमगंड12:36 – 14:10
  • गुलिक काल15:44 – 17:19

राहु काल, यमगंड और गुलिक परंपरा में नए शुभ कार्य के आरंभ के लिए टाले जाने वाले काल हैं — रोज़ के काम के लिए डरने का कारण नहीं।

चौघड़िया

दिन

  • उद्वेग(वर्जित (परंपरा))06:18 – 07:53
  • चर(सामान्य)07:53 – 09:27
  • लाभ(शुभ)09:27 – 11:01
  • अमृत(शुभ)11:01 – 12:36
  • काल(वर्जित (परंपरा))12:36 – 14:10
  • शुभ(शुभ)14:10 – 15:44
  • रोग(वर्जित (परंपरा))15:44 – 17:19
  • उद्वेग(वर्जित (परंपरा))17:19 – 18:53

रात

  • शुभ(शुभ)18:53 – 20:19
  • अमृत(शुभ)20:19 – 21:44
  • चर(सामान्य)21:44 – 23:10
  • रोग(वर्जित (परंपरा))23:10 – 00:36 (27 अग॰)
  • काल(वर्जित (परंपरा))00:36 (27 अग॰) – 02:01 (27 अग॰)
  • लाभ(शुभ)02:01 (27 अग॰) – 03:27 (27 अग॰)
  • उद्वेग(वर्जित (परंपरा))03:27 (27 अग॰) – 04:53 (27 अग॰)
  • शुभ(शुभ)04:53 (27 अग॰) – 06:18 (27 अग॰)

पुस्तक: पंचांग स्थान, सूर्योदय, समय-क्षेत्र और अयनांश पर निर्भर है — संस्कार, पर्व या मुहूर्त के लिए प्रकाशित स्थानीय पंचांग से समय सत्यापित करें।

निरयन लाहिड़ी अयनांश; सूर्योदय-सूर्यास्त सूर्य-बिंब के ऊपरी किनारे से, वायुमंडलीय अपवर्तन सहित। प्रकाशित पंचांगों से 1–2 मिनट का अंतर संभव।

पुस्तक में:अध्याय 3 · जन्म-विवरण से कुंडली कैसे बनती है · पृष्ठ 22

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