पंचांग 30 मार्च 1985
तिथि और स्थान चुनें — सूर्योदय से अगले सूर्योदय तक तिथि, नक्षत्र, योग, करण, राहु काल और चौघड़िया। गणना आपके फ़ोन पर ही होती है।
स्थान
तिथि (तारीख)
30 मार्च 1985 · शनिवार
पुणे — Pune, Maharashtra · समय इस स्थान के समय-क्षेत्र में (Asia/Kolkata)
इस महीने का पंचांग (कैलेंडर) सूर्योदय06:30
सूर्यास्त18:47
चंद्रोदय12:41
चंद्रास्त02:27 (31 मार्च)
- मास:
- चैत्र (अमांत)
- संवत:
- शक 1907 · विक्रम (चैत्रादि) 2042
- संवत्सर:
- क्रोधन (शक-आधारित, महाराष्ट्र/दक्षिण परंपरा)
- ऋतु · अयन:
- वसंत · उत्तरायण
- सूर्य राशि:
- मीन
- चंद्र राशि:
- मिथुन 00:55 (31 मार्च) तक, फिर कर्क
पंचांग के अंग — सूर्योदय से अगले सूर्योदय तक
- वार
- शनिवार
- तिथि
- शुक्ल अष्टमी 09:49 तक, फिर शुक्ल नवमी 09:28 (31 मार्च) तक
- नक्षत्र
- आर्द्रा 06:32 तक, फिर पुनर्वसु 06:56 (31 मार्च) तक
- योग
- शोभन 08:19 तक, फिर अतिगण्ड 06:59 (31 मार्च) तक
- करण
- बव 09:49 तक, फिर बालव 21:45 तक, फिर कौलव 09:28 (31 मार्च) तक
मुहूर्त-काल
- अभिजित मुहूर्त12:14 – 13:03
- राहु काल09:35 – 11:07
- यमगंड14:11 – 15:43
- गुलिक काल06:30 – 08:02
राहु काल, यमगंड और गुलिक परंपरा में नए शुभ कार्य के आरंभ के लिए टाले जाने वाले काल हैं — रोज़ के काम के लिए डरने का कारण नहीं।
चौघड़िया
दिन
- काल(वर्जित (परंपरा))06:30 – 08:02
- शुभ(शुभ)08:02 – 09:35
- रोग(वर्जित (परंपरा))09:35 – 11:07
- उद्वेग(वर्जित (परंपरा))11:07 – 12:39
- चर(सामान्य)12:39 – 14:11
- लाभ(शुभ)14:11 – 15:43
- अमृत(शुभ)15:43 – 17:15
- काल(वर्जित (परंपरा))17:15 – 18:47
रात
- लाभ(शुभ)18:47 – 20:15
- उद्वेग(वर्जित (परंपरा))20:15 – 21:43
- शुभ(शुभ)21:43 – 23:11
- अमृत(शुभ)23:11 – 00:38 (31 मार्च)
- चर(सामान्य)00:38 (31 मार्च) – 02:06 (31 मार्च)
- रोग(वर्जित (परंपरा))02:06 (31 मार्च) – 03:34 (31 मार्च)
- काल(वर्जित (परंपरा))03:34 (31 मार्च) – 05:02 (31 मार्च)
- लाभ(शुभ)05:02 (31 मार्च) – 06:29 (31 मार्च)
पुस्तक: पंचांग स्थान, सूर्योदय, समय-क्षेत्र और अयनांश पर निर्भर है — संस्कार, पर्व या मुहूर्त के लिए प्रकाशित स्थानीय पंचांग से समय सत्यापित करें।
निरयन लाहिड़ी अयनांश; सूर्योदय-सूर्यास्त सूर्य-बिंब के ऊपरी किनारे से, वायुमंडलीय अपवर्तन सहित। प्रकाशित पंचांगों से 1–2 मिनट का अंतर संभव।
पुस्तक में:अध्याय 3 · जन्म-विवरण से कुंडली कैसे बनती है · पृष्ठ 22
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