पंचांग 31 मार्च 1985

तिथि और स्थान चुनें — सूर्योदय से अगले सूर्योदय तक तिथि, नक्षत्र, योग, करण, राहु काल और चौघड़िया। गणना आपके फ़ोन पर ही होती है।

स्थान
तिथि (तारीख)

31 मार्च 1985 · रविवार

पुणे — Pune, Maharashtra · समय इस स्थान के समय-क्षेत्र में (Asia/Kolkata)

इस महीने का पंचांग (कैलेंडर)
सूर्योदय06:29
सूर्यास्त18:47
चंद्रोदय13:41
चंद्रास्त03:19 (1 अप्रैल)
मास:
चैत्र (अमांत)
संवत:
शक 1907 · विक्रम (चैत्रादि) 2042
संवत्सर:
क्रोधन (शक-आधारित, महाराष्ट्र/दक्षिण परंपरा)
ऋतु · अयन:
वसंत · उत्तरायण
सूर्य राशि:
मीन
चंद्र राशि:
कर्क

पंचांग के अंग — सूर्योदय से अगले सूर्योदय तक

वार
रविवार
तिथि
शुक्ल नवमी 09:28 तक, फिर शुक्ल दशमी 08:16 (1 अप्रैल) तक
नक्षत्र
पुनर्वसु 06:56 तक, फिर पुष्य 06:31 (1 अप्रैल) तक
योग
अतिगण्ड 06:59 तक, फिर सुकर्मा 04:59 (1 अप्रैल) तक, फिर धृति 02:21 (2 अप्रैल) तक
करण
कौलव 09:28 तक, फिर तैतिल 20:58 तक, फिर गर 08:16 (1 अप्रैल) तक

मुहूर्त-काल

  • अभिजित मुहूर्त12:14 – 13:03
  • राहु काल17:15 – 18:47
  • यमगंड12:38 – 14:11
  • गुलिक काल15:43 – 17:15

राहु काल, यमगंड और गुलिक परंपरा में नए शुभ कार्य के आरंभ के लिए टाले जाने वाले काल हैं — रोज़ के काम के लिए डरने का कारण नहीं।

चौघड़िया

दिन

  • उद्वेग(वर्जित (परंपरा))06:29 – 08:02
  • चर(सामान्य)08:02 – 09:34
  • लाभ(शुभ)09:34 – 11:06
  • अमृत(शुभ)11:06 – 12:38
  • काल(वर्जित (परंपरा))12:38 – 14:11
  • शुभ(शुभ)14:11 – 15:43
  • रोग(वर्जित (परंपरा))15:43 – 17:15
  • उद्वेग(वर्जित (परंपरा))17:15 – 18:47

रात

  • शुभ(शुभ)18:47 – 20:15
  • अमृत(शुभ)20:15 – 21:43
  • चर(सामान्य)21:43 – 23:10
  • रोग(वर्जित (परंपरा))23:10 – 00:38 (1 अप्रैल)
  • काल(वर्जित (परंपरा))00:38 (1 अप्रैल) – 02:06 (1 अप्रैल)
  • लाभ(शुभ)02:06 (1 अप्रैल) – 03:33 (1 अप्रैल)
  • उद्वेग(वर्जित (परंपरा))03:33 (1 अप्रैल) – 05:01 (1 अप्रैल)
  • शुभ(शुभ)05:01 (1 अप्रैल) – 06:29 (1 अप्रैल)

पुस्तक: पंचांग स्थान, सूर्योदय, समय-क्षेत्र और अयनांश पर निर्भर है — संस्कार, पर्व या मुहूर्त के लिए प्रकाशित स्थानीय पंचांग से समय सत्यापित करें।

निरयन लाहिड़ी अयनांश; सूर्योदय-सूर्यास्त सूर्य-बिंब के ऊपरी किनारे से, वायुमंडलीय अपवर्तन सहित। प्रकाशित पंचांगों से 1–2 मिनट का अंतर संभव।

पुस्तक में:अध्याय 3 · जन्म-विवरण से कुंडली कैसे बनती है · पृष्ठ 22

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