पंचांग 16 अगस्त 1994
तिथि और स्थान चुनें — सूर्योदय से अगले सूर्योदय तक तिथि, नक्षत्र, योग, करण, राहु काल और चौघड़िया। गणना आपके फ़ोन पर ही होती है।
स्थान
तिथि (तारीख)
16 अगस्त 1994 · मंगलवार
पुणे — Pune, Maharashtra · समय इस स्थान के समय-क्षेत्र में (Asia/Kolkata)
इस महीने का पंचांग (कैलेंडर) सूर्योदय06:16
सूर्यास्त19:01
चंद्रोदय14:48
चंद्रास्त02:16 (17 अग॰)
- मास:
- श्रावण (अमांत)
- संवत:
- शक 1916 · विक्रम (चैत्रादि) 2051
- संवत्सर:
- भाव (शक-आधारित, महाराष्ट्र/दक्षिण परंपरा)
- ऋतु · अयन:
- वर्षा · दक्षिणायन
- सूर्य राशि:
- कर्क
- चंद्र राशि:
- वृश्चिक 19:05 तक, फिर धनु
पंचांग के अंग — सूर्योदय से अगले सूर्योदय तक
- वार
- मंगलवार
- तिथि
- शुक्ल दशमी 18:29 तक, फिर शुक्ल एकादशी 16:43 (17 अग॰) तक
- नक्षत्र
- ज्येष्ठा 19:05 तक, फिर मूल 18:06 (17 अग॰) तक
- योग
- वैधृति 19:37 तक, फिर विष्कम्भ 17:08 (17 अग॰) तक
- करण
- तैतिल 07:25 तक, फिर गर 18:29 तक, फिर वणिज 05:35 (17 अग॰) तक, फिर विष्टि 16:43 (17 अग॰) तक
मुहूर्त-काल
- अभिजित मुहूर्त12:13 – 13:04
- राहु काल15:49 – 17:25
- यमगंड09:27 – 11:03
- गुलिक काल12:38 – 14:14
राहु काल, यमगंड और गुलिक परंपरा में नए शुभ कार्य के आरंभ के लिए टाले जाने वाले काल हैं — रोज़ के काम के लिए डरने का कारण नहीं।
चौघड़िया
दिन
- रोग(वर्जित (परंपरा))06:16 – 07:51
- उद्वेग(वर्जित (परंपरा))07:51 – 09:27
- चर(सामान्य)09:27 – 11:03
- लाभ(शुभ)11:03 – 12:38
- अमृत(शुभ)12:38 – 14:14
- काल(वर्जित (परंपरा))14:14 – 15:49
- शुभ(शुभ)15:49 – 17:25
- रोग(वर्जित (परंपरा))17:25 – 19:01
रात
- काल(वर्जित (परंपरा))19:01 – 20:25
- लाभ(शुभ)20:25 – 21:50
- उद्वेग(वर्जित (परंपरा))21:50 – 23:14
- शुभ(शुभ)23:14 – 00:38 (17 अग॰)
- अमृत(शुभ)00:38 (17 अग॰) – 02:03 (17 अग॰)
- चर(सामान्य)02:03 (17 अग॰) – 03:27 (17 अग॰)
- रोग(वर्जित (परंपरा))03:27 (17 अग॰) – 04:52 (17 अग॰)
- काल(वर्जित (परंपरा))04:52 (17 अग॰) – 06:16 (17 अग॰)
पुस्तक: पंचांग स्थान, सूर्योदय, समय-क्षेत्र और अयनांश पर निर्भर है — संस्कार, पर्व या मुहूर्त के लिए प्रकाशित स्थानीय पंचांग से समय सत्यापित करें।
निरयन लाहिड़ी अयनांश; सूर्योदय-सूर्यास्त सूर्य-बिंब के ऊपरी किनारे से, वायुमंडलीय अपवर्तन सहित। प्रकाशित पंचांगों से 1–2 मिनट का अंतर संभव।
पुस्तक में:अध्याय 3 · जन्म-विवरण से कुंडली कैसे बनती है · पृष्ठ 5
अपनी कुंडली देखें