पंचांग 17 अगस्त 1994

तिथि और स्थान चुनें — सूर्योदय से अगले सूर्योदय तक तिथि, नक्षत्र, योग, करण, राहु काल और चौघड़िया। गणना आपके फ़ोन पर ही होती है।

स्थान
तिथि (तारीख)

17 अगस्त 1994 · बुधवार

पुणे — Pune, Maharashtra · समय इस स्थान के समय-क्षेत्र में (Asia/Kolkata)

इस महीने का पंचांग (कैलेंडर)
सूर्योदय06:16
सूर्यास्त19:00
चंद्रोदय15:44
चंद्रास्त03:15 (18 अग॰)
मास:
श्रावण (अमांत)
संवत:
शक 1916 · विक्रम (चैत्रादि) 2051
संवत्सर:
भाव (शक-आधारित, महाराष्ट्र/दक्षिण परंपरा)
ऋतु · अयन:
वर्षा · दक्षिणायन
सूर्य राशि:
सिंह
चंद्र राशि:
धनु

पंचांग के अंग — सूर्योदय से अगले सूर्योदय तक

वार
बुधवार
तिथि
शुक्ल एकादशी 16:43 तक, फिर शुक्ल द्वादशी 15:09 (18 अग॰) तक
नक्षत्र
मूल 18:06 तक, फिर पूर्वाषाढ़ा 17:18 (18 अग॰) तक
योग
विष्कम्भ 17:08 तक, फिर प्रीति 14:48 (18 अग॰) तक
करण
विष्टि 16:43 तक, फिर बव 03:54 (18 अग॰) तक, फिर बालव 15:09 (18 अग॰) तक

मुहूर्त-काल

  • अभिजित मुहूर्त12:13 – 13:04परंपरा में बुधवार को अभिजित नहीं लिया जाता
  • राहु काल12:38 – 14:14
  • यमगंड07:52 – 09:27
  • गुलिक काल11:03 – 12:38

राहु काल, यमगंड और गुलिक परंपरा में नए शुभ कार्य के आरंभ के लिए टाले जाने वाले काल हैं — रोज़ के काम के लिए डरने का कारण नहीं।

चौघड़िया

दिन

  • लाभ(शुभ)06:16 – 07:52
  • अमृत(शुभ)07:52 – 09:27
  • काल(वर्जित (परंपरा))09:27 – 11:03
  • शुभ(शुभ)11:03 – 12:38
  • रोग(वर्जित (परंपरा))12:38 – 14:14
  • उद्वेग(वर्जित (परंपरा))14:14 – 15:49
  • चर(सामान्य)15:49 – 17:25
  • लाभ(शुभ)17:25 – 19:00

रात

  • उद्वेग(वर्जित (परंपरा))19:00 – 20:25
  • शुभ(शुभ)20:25 – 21:49
  • अमृत(शुभ)21:49 – 23:14
  • चर(सामान्य)23:14 – 00:38 (18 अग॰)
  • रोग(वर्जित (परंपरा))00:38 (18 अग॰) – 02:03 (18 अग॰)
  • काल(वर्जित (परंपरा))02:03 (18 अग॰) – 03:27 (18 अग॰)
  • लाभ(शुभ)03:27 (18 अग॰) – 04:52 (18 अग॰)
  • उद्वेग(वर्जित (परंपरा))04:52 (18 अग॰) – 06:16 (18 अग॰)

पुस्तक: पंचांग स्थान, सूर्योदय, समय-क्षेत्र और अयनांश पर निर्भर है — संस्कार, पर्व या मुहूर्त के लिए प्रकाशित स्थानीय पंचांग से समय सत्यापित करें।

निरयन लाहिड़ी अयनांश; सूर्योदय-सूर्यास्त सूर्य-बिंब के ऊपरी किनारे से, वायुमंडलीय अपवर्तन सहित। प्रकाशित पंचांगों से 1–2 मिनट का अंतर संभव।

पुस्तक में:अध्याय 3 · जन्म-विवरण से कुंडली कैसे बनती है · पृष्ठ 5

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