पंचांग 18 अगस्त 1994

तिथि और स्थान चुनें — सूर्योदय से अगले सूर्योदय तक तिथि, नक्षत्र, योग, करण, राहु काल और चौघड़िया। गणना आपके फ़ोन पर ही होती है।

स्थान
तिथि (तारीख)

18 अगस्त 1994 · गुरुवार

पुणे — Pune, Maharashtra · समय इस स्थान के समय-क्षेत्र में (Asia/Kolkata)

इस महीने का पंचांग (कैलेंडर)
सूर्योदय06:16
सूर्यास्त18:59
चंद्रोदय16:37
चंद्रास्त04:14 (19 अग॰)
मास:
श्रावण (अमांत)
संवत:
शक 1916 · विक्रम (चैत्रादि) 2051
संवत्सर:
भाव (शक-आधारित, महाराष्ट्र/दक्षिण परंपरा)
ऋतु · अयन:
वर्षा · दक्षिणायन
सूर्य राशि:
सिंह
चंद्र राशि:
धनु 23:08 तक, फिर मकर

पंचांग के अंग — सूर्योदय से अगले सूर्योदय तक

वार
गुरुवार
तिथि
शुक्ल द्वादशी 15:09 तक, फिर शुक्ल त्रयोदशी 13:49 (19 अग॰) तक
नक्षत्र
पूर्वाषाढ़ा 17:18 तक, फिर उत्तराषाढ़ा 16:45 (19 अग॰) तक
योग
प्रीति 14:48 तक, फिर आयुष्मान 12:40 (19 अग॰) तक
करण
बालव 15:09 तक, फिर कौलव 02:27 (19 अग॰) तक, फिर तैतिल 13:49 (19 अग॰) तक

मुहूर्त-काल

  • अभिजित मुहूर्त12:12 – 13:03
  • राहु काल14:13 – 15:49
  • यमगंड06:16 – 07:52
  • गुलिक काल09:27 – 11:02

राहु काल, यमगंड और गुलिक परंपरा में नए शुभ कार्य के आरंभ के लिए टाले जाने वाले काल हैं — रोज़ के काम के लिए डरने का कारण नहीं।

चौघड़िया

दिन

  • शुभ(शुभ)06:16 – 07:52
  • रोग(वर्जित (परंपरा))07:52 – 09:27
  • उद्वेग(वर्जित (परंपरा))09:27 – 11:02
  • चर(सामान्य)11:02 – 12:38
  • लाभ(शुभ)12:38 – 14:13
  • अमृत(शुभ)14:13 – 15:49
  • काल(वर्जित (परंपरा))15:49 – 17:24
  • शुभ(शुभ)17:24 – 18:59

रात

  • अमृत(शुभ)18:59 – 20:24
  • चर(सामान्य)20:24 – 21:49
  • रोग(वर्जित (परंपरा))21:49 – 23:13
  • काल(वर्जित (परंपरा))23:13 – 00:38 (19 अग॰)
  • लाभ(शुभ)00:38 (19 अग॰) – 02:03 (19 अग॰)
  • उद्वेग(वर्जित (परंपरा))02:03 (19 अग॰) – 03:27 (19 अग॰)
  • शुभ(शुभ)03:27 (19 अग॰) – 04:52 (19 अग॰)
  • अमृत(शुभ)04:52 (19 अग॰) – 06:17 (19 अग॰)

पुस्तक: पंचांग स्थान, सूर्योदय, समय-क्षेत्र और अयनांश पर निर्भर है — संस्कार, पर्व या मुहूर्त के लिए प्रकाशित स्थानीय पंचांग से समय सत्यापित करें।

निरयन लाहिड़ी अयनांश; सूर्योदय-सूर्यास्त सूर्य-बिंब के ऊपरी किनारे से, वायुमंडलीय अपवर्तन सहित। प्रकाशित पंचांगों से 1–2 मिनट का अंतर संभव।

पुस्तक में:अध्याय 3 · जन्म-विवरण से कुंडली कैसे बनती है · पृष्ठ 5

अपनी कुंडली देखें