पंचांग 10 अक्टूबर 2005

तिथि और स्थान चुनें — सूर्योदय से अगले सूर्योदय तक तिथि, नक्षत्र, योग, करण, राहु काल और चौघड़िया। गणना आपके फ़ोन पर ही होती है।

स्थान
तिथि (तारीख)

10 अक्टूबर 2005 · सोमवार

पुणे — Pune, Maharashtra · समय इस स्थान के समय-क्षेत्र में (Asia/Kolkata)

इस महीने का पंचांग (कैलेंडर)
सूर्योदय06:27
सूर्यास्त18:15
चंद्रोदय12:49
चंद्रास्त23:53
मास:
आश्विन (अमांत)
संवत:
शक 1927 · विक्रम (चैत्रादि) 2062
संवत्सर:
पार्थिव (शक-आधारित, महाराष्ट्र/दक्षिण परंपरा)
ऋतु · अयन:
शरद · दक्षिणायन
सूर्य राशि:
कन्या
चंद्र राशि:
धनु

पंचांग के अंग — सूर्योदय से अगले सूर्योदय तक

वार
सोमवार
तिथि
शुक्ल सप्तमी 13:27 तक, फिर शुक्ल अष्टमी 11:29 (11 अक्टू॰) तक
नक्षत्र
मूल 06:49 तक, फिर पूर्वाषाढ़ा 05:40 (11 अक्टू॰) तक, फिर उत्तराषाढ़ा 04:12 (12 अक्टू॰) तक
योग
शोभन 07:31 तक, फिर अतिगण्ड 04:51 (11 अक्टू॰) तक, फिर सुकर्मा 01:56 (12 अक्टू॰) तक
करण
वणिज 13:27 तक, फिर विष्टि 00:31 (11 अक्टू॰) तक, फिर बव 11:29 (11 अक्टू॰) तक

मुहूर्त-काल

  • अभिजित मुहूर्त11:57 – 12:45
  • राहु काल07:55 – 09:24
  • यमगंड10:52 – 12:21
  • गुलिक काल13:50 – 15:18

राहु काल, यमगंड और गुलिक परंपरा में नए शुभ कार्य के आरंभ के लिए टाले जाने वाले काल हैं — रोज़ के काम के लिए डरने का कारण नहीं।

चौघड़िया

दिन

  • अमृत(शुभ)06:27 – 07:55
  • काल(वर्जित (परंपरा))07:55 – 09:24
  • शुभ(शुभ)09:24 – 10:52
  • रोग(वर्जित (परंपरा))10:52 – 12:21
  • उद्वेग(वर्जित (परंपरा))12:21 – 13:50
  • चर(सामान्य)13:50 – 15:18
  • लाभ(शुभ)15:18 – 16:47
  • अमृत(शुभ)16:47 – 18:15

रात

  • चर(सामान्य)18:15 – 19:47
  • रोग(वर्जित (परंपरा))19:47 – 21:18
  • काल(वर्जित (परंपरा))21:18 – 22:50
  • लाभ(शुभ)22:50 – 00:21 (11 अक्टू॰)
  • उद्वेग(वर्जित (परंपरा))00:21 (11 अक्टू॰) – 01:53 (11 अक्टू॰)
  • शुभ(शुभ)01:53 (11 अक्टू॰) – 03:24 (11 अक्टू॰)
  • अमृत(शुभ)03:24 (11 अक्टू॰) – 04:55 (11 अक्टू॰)
  • चर(सामान्य)04:55 (11 अक्टू॰) – 06:27 (11 अक्टू॰)

पुस्तक: पंचांग स्थान, सूर्योदय, समय-क्षेत्र और अयनांश पर निर्भर है — संस्कार, पर्व या मुहूर्त के लिए प्रकाशित स्थानीय पंचांग से समय सत्यापित करें।

निरयन लाहिड़ी अयनांश; सूर्योदय-सूर्यास्त सूर्य-बिंब के ऊपरी किनारे से, वायुमंडलीय अपवर्तन सहित। प्रकाशित पंचांगों से 1–2 मिनट का अंतर संभव।

पुस्तक में:विस्तार 4 · पंचांग, तिथि, योग और करण · पृष्ठ 123

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