पंचांग 11 अक्टूबर 2005

तिथि और स्थान चुनें — सूर्योदय से अगले सूर्योदय तक तिथि, नक्षत्र, योग, करण, राहु काल और चौघड़िया। गणना आपके फ़ोन पर ही होती है।

स्थान
तिथि (तारीख)

11 अक्टूबर 2005 · मंगलवार

पुणे — Pune, Maharashtra · समय इस स्थान के समय-क्षेत्र में (Asia/Kolkata)

इस महीने का पंचांग (कैलेंडर)
सूर्योदय06:27
सूर्यास्त18:15
चंद्रोदय13:46
चंद्रास्त00:58 (12 अक्टू॰)
मास:
आश्विन (अमांत)
संवत:
शक 1927 · विक्रम (चैत्रादि) 2062
संवत्सर:
पार्थिव (शक-आधारित, महाराष्ट्र/दक्षिण परंपरा)
ऋतु · अयन:
शरद · दक्षिणायन
सूर्य राशि:
कन्या
चंद्र राशि:
धनु 11:20 तक, फिर मकर

पंचांग के अंग — सूर्योदय से अगले सूर्योदय तक

वार
मंगलवार
तिथि
शुक्ल अष्टमी 11:29 तक, फिर शुक्ल नवमी 09:12 (12 अक्टू॰) तक
नक्षत्र
उत्तराषाढ़ा 04:12 (12 अक्टू॰) तक, फिर श्रवण 02:29 (13 अक्टू॰) तक
योग
सुकर्मा 01:56 (12 अक्टू॰) तक, फिर धृति 22:48 (12 अक्टू॰) तक
करण
बव 11:29 तक, फिर बालव 22:23 तक, फिर कौलव 09:12 (12 अक्टू॰) तक

मुहूर्त-काल

  • अभिजित मुहूर्त11:57 – 12:44
  • राहु काल15:18 – 16:46
  • यमगंड09:24 – 10:52
  • गुलिक काल12:21 – 13:49

राहु काल, यमगंड और गुलिक परंपरा में नए शुभ कार्य के आरंभ के लिए टाले जाने वाले काल हैं — रोज़ के काम के लिए डरने का कारण नहीं।

चौघड़िया

दिन

  • रोग(वर्जित (परंपरा))06:27 – 07:55
  • उद्वेग(वर्जित (परंपरा))07:55 – 09:24
  • चर(सामान्य)09:24 – 10:52
  • लाभ(शुभ)10:52 – 12:21
  • अमृत(शुभ)12:21 – 13:49
  • काल(वर्जित (परंपरा))13:49 – 15:18
  • शुभ(शुभ)15:18 – 16:46
  • रोग(वर्जित (परंपरा))16:46 – 18:15

रात

  • काल(वर्जित (परंपरा))18:15 – 19:46
  • लाभ(शुभ)19:46 – 21:18
  • उद्वेग(वर्जित (परंपरा))21:18 – 22:49
  • शुभ(शुभ)22:49 – 00:21 (12 अक्टू॰)
  • अमृत(शुभ)00:21 (12 अक्टू॰) – 01:52 (12 अक्टू॰)
  • चर(सामान्य)01:52 (12 अक्टू॰) – 03:24 (12 अक्टू॰)
  • रोग(वर्जित (परंपरा))03:24 (12 अक्टू॰) – 04:55 (12 अक्टू॰)
  • काल(वर्जित (परंपरा))04:55 (12 अक्टू॰) – 06:27 (12 अक्टू॰)

पुस्तक: पंचांग स्थान, सूर्योदय, समय-क्षेत्र और अयनांश पर निर्भर है — संस्कार, पर्व या मुहूर्त के लिए प्रकाशित स्थानीय पंचांग से समय सत्यापित करें।

निरयन लाहिड़ी अयनांश; सूर्योदय-सूर्यास्त सूर्य-बिंब के ऊपरी किनारे से, वायुमंडलीय अपवर्तन सहित। प्रकाशित पंचांगों से 1–2 मिनट का अंतर संभव।

पुस्तक में:विस्तार 4 · पंचांग, तिथि, योग और करण · पृष्ठ 123

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