पंचांग 7 अगस्त 2007

तिथि और स्थान चुनें — सूर्योदय से अगले सूर्योदय तक तिथि, नक्षत्र, योग, करण, राहु काल और चौघड़िया। गणना आपके फ़ोन पर ही होती है।

स्थान
तिथि (तारीख)

7 अगस्त 2007 · मंगलवार

पुणे — Pune, Maharashtra · समय इस स्थान के समय-क्षेत्र में (Asia/Kolkata)

इस महीने का पंचांग (कैलेंडर)
सूर्योदय06:13
सूर्यास्त19:06
चंद्रोदय01:23 (8 अग॰)
चंद्रास्त14:12
मास:
आषाढ़ (अमांत) · श्रावण (पूर्णिमांत)
संवत:
शक 1929 · विक्रम (चैत्रादि) 2064
संवत्सर:
सर्वजित (शक-आधारित, महाराष्ट्र/दक्षिण परंपरा)
ऋतु · अयन:
ग्रीष्म · दक्षिणायन
सूर्य राशि:
कर्क
चंद्र राशि:
वृषभ

पंचांग के अंग — सूर्योदय से अगले सूर्योदय तक

वार
मंगलवार
तिथि
कृष्ण नवमी 11:34 तक, फिर कृष्ण दशमी 09:37 (8 अग॰) तक
नक्षत्र
कृत्तिका 14:16 तक, फिर रोहिणी 13:07 (8 अग॰) तक
योग
वृद्धि 08:07 तक, फिर ध्रुव 05:26 (8 अग॰) तक, फिर व्याघात 02:57 (9 अग॰) तक
करण
गर 11:34 तक, फिर वणिज 22:34 तक, फिर विष्टि 09:37 (8 अग॰) तक

मुहूर्त-काल

  • अभिजित मुहूर्त12:14 – 13:06
  • राहु काल15:53 – 17:30
  • यमगंड09:27 – 11:03
  • गुलिक काल12:40 – 14:16

राहु काल, यमगंड और गुलिक परंपरा में नए शुभ कार्य के आरंभ के लिए टाले जाने वाले काल हैं — रोज़ के काम के लिए डरने का कारण नहीं।

चौघड़िया

दिन

  • रोग(वर्जित (परंपरा))06:13 – 07:50
  • उद्वेग(वर्जित (परंपरा))07:50 – 09:27
  • चर(सामान्य)09:27 – 11:03
  • लाभ(शुभ)11:03 – 12:40
  • अमृत(शुभ)12:40 – 14:16
  • काल(वर्जित (परंपरा))14:16 – 15:53
  • शुभ(शुभ)15:53 – 17:30
  • रोग(वर्जित (परंपरा))17:30 – 19:06

रात

  • काल(वर्जित (परंपरा))19:06 – 20:30
  • लाभ(शुभ)20:30 – 21:53
  • उद्वेग(वर्जित (परंपरा))21:53 – 23:16
  • शुभ(शुभ)23:16 – 00:40 (8 अग॰)
  • अमृत(शुभ)00:40 (8 अग॰) – 02:03 (8 अग॰)
  • चर(सामान्य)02:03 (8 अग॰) – 03:27 (8 अग॰)
  • रोग(वर्जित (परंपरा))03:27 (8 अग॰) – 04:50 (8 अग॰)
  • काल(वर्जित (परंपरा))04:50 (8 अग॰) – 06:14 (8 अग॰)

पुस्तक: पंचांग स्थान, सूर्योदय, समय-क्षेत्र और अयनांश पर निर्भर है — संस्कार, पर्व या मुहूर्त के लिए प्रकाशित स्थानीय पंचांग से समय सत्यापित करें।

निरयन लाहिड़ी अयनांश; सूर्योदय-सूर्यास्त सूर्य-बिंब के ऊपरी किनारे से, वायुमंडलीय अपवर्तन सहित। प्रकाशित पंचांगों से 1–2 मिनट का अंतर संभव।

पुस्तक में:विस्तार 4 · पंचांग, तिथि, योग और करण · पृष्ठ 123

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