पंचांग 30 अक्टूबर 2007
तिथि और स्थान चुनें — सूर्योदय से अगले सूर्योदय तक तिथि, नक्षत्र, योग, करण, राहु काल और चौघड़िया। गणना आपके फ़ोन पर ही होती है।
स्थान
तिथि (तारीख)
30 अक्टूबर 2007 · मंगलवार
पुणे — Pune, Maharashtra · समय इस स्थान के समय-क्षेत्र में (Asia/Kolkata)
इस महीने का पंचांग (कैलेंडर) सूर्योदय06:33
सूर्यास्त18:03
चंद्रोदय22:02
चंद्रास्त10:54
- मास:
- आश्विन (अमांत) · कार्तिक (पूर्णिमांत)
- संवत:
- शक 1929 · विक्रम (चैत्रादि) 2064
- संवत्सर:
- सर्वजित (शक-आधारित, महाराष्ट्र/दक्षिण परंपरा)
- ऋतु · अयन:
- शरद · दक्षिणायन
- सूर्य राशि:
- तुला
- चंद्र राशि:
- मिथुन
पंचांग के अंग — सूर्योदय से अगले सूर्योदय तक
- वार
- मंगलवार
- तिथि
- कृष्ण पंचमी 17:34 तक, फिर कृष्ण षष्ठी 15:51 (31 अक्टू॰) तक
- नक्षत्र
- मृगशीर्ष 07:23 तक, फिर आर्द्रा 06:02 (31 अक्टू॰) तक, फिर पुनर्वसु 05:28 (1 नव॰) तक
- योग
- शिव 19:32 तक, फिर सिद्ध 17:01 (31 अक्टू॰) तक
- करण
- कौलव 06:42 तक, फिर तैतिल 17:34 तक, फिर गर 04:36 (31 अक्टू॰) तक, फिर वणिज 15:51 (31 अक्टू॰) तक
मुहूर्त-काल
- अभिजित मुहूर्त11:55 – 12:41
- राहु काल15:10 – 16:36
- यमगंड09:25 – 10:51
- गुलिक काल12:18 – 13:44
राहु काल, यमगंड और गुलिक परंपरा में नए शुभ कार्य के आरंभ के लिए टाले जाने वाले काल हैं — रोज़ के काम के लिए डरने का कारण नहीं।
चौघड़िया
दिन
- रोग(वर्जित (परंपरा))06:33 – 07:59
- उद्वेग(वर्जित (परंपरा))07:59 – 09:25
- चर(सामान्य)09:25 – 10:51
- लाभ(शुभ)10:51 – 12:18
- अमृत(शुभ)12:18 – 13:44
- काल(वर्जित (परंपरा))13:44 – 15:10
- शुभ(शुभ)15:10 – 16:36
- रोग(वर्जित (परंपरा))16:36 – 18:03
रात
- काल(वर्जित (परंपरा))18:03 – 19:36
- लाभ(शुभ)19:36 – 21:10
- उद्वेग(वर्जित (परंपरा))21:10 – 22:44
- शुभ(शुभ)22:44 – 00:18 (31 अक्टू॰)
- अमृत(शुभ)00:18 (31 अक्टू॰) – 01:52 (31 अक्टू॰)
- चर(सामान्य)01:52 (31 अक्टू॰) – 03:25 (31 अक्टू॰)
- रोग(वर्जित (परंपरा))03:25 (31 अक्टू॰) – 04:59 (31 अक्टू॰)
- काल(वर्जित (परंपरा))04:59 (31 अक्टू॰) – 06:33 (31 अक्टू॰)
पुस्तक: पंचांग स्थान, सूर्योदय, समय-क्षेत्र और अयनांश पर निर्भर है — संस्कार, पर्व या मुहूर्त के लिए प्रकाशित स्थानीय पंचांग से समय सत्यापित करें।
निरयन लाहिड़ी अयनांश; सूर्योदय-सूर्यास्त सूर्य-बिंब के ऊपरी किनारे से, वायुमंडलीय अपवर्तन सहित। प्रकाशित पंचांगों से 1–2 मिनट का अंतर संभव।
पुस्तक में:विस्तार 4 · पंचांग, तिथि, योग और करण · पृष्ठ 123
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