पंचांग 24 दिसंबर 2007

तिथि और स्थान चुनें — सूर्योदय से अगले सूर्योदय तक तिथि, नक्षत्र, योग, करण, राहु काल और चौघड़िया। गणना आपके फ़ोन पर ही होती है।

स्थान
तिथि (तारीख)

24 दिसंबर 2007 · सोमवार

पुणे — Pune, Maharashtra · समय इस स्थान के समय-क्षेत्र में (Asia/Kolkata)

इस महीने का पंचांग (कैलेंडर)
सूर्योदय07:03
सूर्यास्त18:04
चंद्रोदय18:25
चंद्रास्त07:14
मास:
मार्गशीर्ष (अमांत) · पौष (पूर्णिमांत)
संवत:
शक 1929 · विक्रम (चैत्रादि) 2064
संवत्सर:
सर्वजित (शक-आधारित, महाराष्ट्र/दक्षिण परंपरा)
ऋतु · अयन:
हेमंत · दक्षिणायन
सूर्य राशि:
धनु
चंद्र राशि:
मिथुन

पंचांग के अंग — सूर्योदय से अगले सूर्योदय तक

वार
सोमवार
तिथि
कृष्ण प्रतिपदा 03:48 (25 दिस॰) तक, फिर कृष्ण द्वितीया 01:21 (26 दिस॰) तक
नक्षत्र
आर्द्रा 02:34 (25 दिस॰) तक, फिर पुनर्वसु 00:48 (26 दिस॰) तक
योग
शुक्ल 13:15 तक, फिर ब्रह्म 09:43 (25 दिस॰) तक
करण
बालव 17:14 तक, फिर कौलव 03:48 (25 दिस॰) तक, फिर तैतिल 14:30 (25 दिस॰) तक

मुहूर्त-काल

  • अभिजित मुहूर्त12:11 – 12:55
  • राहु काल08:25 – 09:48
  • यमगंड11:11 – 12:33
  • गुलिक काल13:56 – 15:19

राहु काल, यमगंड और गुलिक परंपरा में नए शुभ कार्य के आरंभ के लिए टाले जाने वाले काल हैं — रोज़ के काम के लिए डरने का कारण नहीं।

चौघड़िया

दिन

  • अमृत(शुभ)07:03 – 08:25
  • काल(वर्जित (परंपरा))08:25 – 09:48
  • शुभ(शुभ)09:48 – 11:11
  • रोग(वर्जित (परंपरा))11:11 – 12:33
  • उद्वेग(वर्जित (परंपरा))12:33 – 13:56
  • चर(सामान्य)13:56 – 15:19
  • लाभ(शुभ)15:19 – 16:41
  • अमृत(शुभ)16:41 – 18:04

रात

  • चर(सामान्य)18:04 – 19:41
  • रोग(वर्जित (परंपरा))19:41 – 21:19
  • काल(वर्जित (परंपरा))21:19 – 22:56
  • लाभ(शुभ)22:56 – 00:34 (25 दिस॰)
  • उद्वेग(वर्जित (परंपरा))00:34 (25 दिस॰) – 02:11 (25 दिस॰)
  • शुभ(शुभ)02:11 (25 दिस॰) – 03:48 (25 दिस॰)
  • अमृत(शुभ)03:48 (25 दिस॰) – 05:26 (25 दिस॰)
  • चर(सामान्य)05:26 (25 दिस॰) – 07:03 (25 दिस॰)

पुस्तक: पंचांग स्थान, सूर्योदय, समय-क्षेत्र और अयनांश पर निर्भर है — संस्कार, पर्व या मुहूर्त के लिए प्रकाशित स्थानीय पंचांग से समय सत्यापित करें।

निरयन लाहिड़ी अयनांश; सूर्योदय-सूर्यास्त सूर्य-बिंब के ऊपरी किनारे से, वायुमंडलीय अपवर्तन सहित। प्रकाशित पंचांगों से 1–2 मिनट का अंतर संभव।

पुस्तक में:विस्तार 4 · पंचांग, तिथि, योग और करण · पृष्ठ 123

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