पंचांग 14 जनवरी 2024

तिथि और स्थान चुनें — सूर्योदय से अगले सूर्योदय तक तिथि, नक्षत्र, योग, करण, राहु काल और चौघड़िया। गणना आपके फ़ोन पर ही होती है।

स्थान
तिथि (तारीख)

14 जनवरी 2024 · रविवार

पुणे — Pune, Maharashtra · समय इस स्थान के समय-क्षेत्र में (Asia/Kolkata)

इस महीने का पंचांग (कैलेंडर)
सूर्योदय07:09
सूर्यास्त18:17
चंद्रोदय09:38
चंद्रास्त21:25
मास:
पौष (अमांत)
संवत:
शक 1945 · विक्रम (चैत्रादि) 2080
संवत्सर:
शोभकृत (शक-आधारित, महाराष्ट्र/दक्षिण परंपरा)
ऋतु · अयन:
हेमंत · दक्षिणायन
सूर्य राशि:
धनु
चंद्र राशि:
कुंभ

पंचांग के अंग — सूर्योदय से अगले सूर्योदय तक

वार
रविवार
तिथि
शुक्ल तृतीया 08:00 तक, फिर शुक्ल चतुर्थी 04:59 (15 जन॰) तक, फिर शुक्ल पंचमी 02:17 (16 जन॰) तक
नक्षत्र
धनिष्ठा 10:22 तक, फिर शतभिषा 08:07 (15 जन॰) तक
योग
व्यतीपात 02:39 (15 जन॰) तक, फिर वरीयान 23:10 (15 जन॰) तक
करण
गर 08:00 तक, फिर वणिज 18:28 तक, फिर विष्टि 04:59 (15 जन॰) तक, फिर बव 15:35 (15 जन॰) तक

मुहूर्त-काल

  • अभिजित मुहूर्त12:21 – 13:05
  • राहु काल16:53 – 18:17
  • यमगंड12:43 – 14:06
  • गुलिक काल15:30 – 16:53

राहु काल, यमगंड और गुलिक परंपरा में नए शुभ कार्य के आरंभ के लिए टाले जाने वाले काल हैं — रोज़ के काम के लिए डरने का कारण नहीं।

चौघड़िया

दिन

  • उद्वेग(वर्जित (परंपरा))07:09 – 08:33
  • चर(सामान्य)08:33 – 09:56
  • लाभ(शुभ)09:56 – 11:19
  • अमृत(शुभ)11:19 – 12:43
  • काल(वर्जित (परंपरा))12:43 – 14:06
  • शुभ(शुभ)14:06 – 15:30
  • रोग(वर्जित (परंपरा))15:30 – 16:53
  • उद्वेग(वर्जित (परंपरा))16:53 – 18:17

रात

  • शुभ(शुभ)18:17 – 19:53
  • अमृत(शुभ)19:53 – 21:30
  • चर(सामान्य)21:30 – 23:06
  • रोग(वर्जित (परंपरा))23:06 – 00:43 (15 जन॰)
  • काल(वर्जित (परंपरा))00:43 (15 जन॰) – 02:20 (15 जन॰)
  • लाभ(शुभ)02:20 (15 जन॰) – 03:56 (15 जन॰)
  • उद्वेग(वर्जित (परंपरा))03:56 (15 जन॰) – 05:33 (15 जन॰)
  • शुभ(शुभ)05:33 (15 जन॰) – 07:09 (15 जन॰)

पुस्तक: पंचांग स्थान, सूर्योदय, समय-क्षेत्र और अयनांश पर निर्भर है — संस्कार, पर्व या मुहूर्त के लिए प्रकाशित स्थानीय पंचांग से समय सत्यापित करें।

निरयन लाहिड़ी अयनांश; सूर्योदय-सूर्यास्त सूर्य-बिंब के ऊपरी किनारे से, वायुमंडलीय अपवर्तन सहित। प्रकाशित पंचांगों से 1–2 मिनट का अंतर संभव।

पुस्तक में:विस्तार 4 · पंचांग, तिथि, योग और करण · पृष्ठ 61

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