पंचांग 15 जनवरी 2024

तिथि और स्थान चुनें — सूर्योदय से अगले सूर्योदय तक तिथि, नक्षत्र, योग, करण, राहु काल और चौघड़िया। गणना आपके फ़ोन पर ही होती है।

स्थान
तिथि (तारीख)

15 जनवरी 2024 · सोमवार

पुणे — Pune, Maharashtra · समय इस स्थान के समय-क्षेत्र में (Asia/Kolkata)

इस महीने का पंचांग (कैलेंडर)
सूर्योदय07:09
सूर्यास्त18:17
चंद्रोदय10:21
चंद्रास्त22:26
मास:
पौष (अमांत)
संवत:
शक 1945 · विक्रम (चैत्रादि) 2080
संवत्सर:
शोभकृत (शक-आधारित, महाराष्ट्र/दक्षिण परंपरा)
ऋतु · अयन:
हेमंत · उत्तरायण
सूर्य राशि:
मकर
चंद्र राशि:
कुंभ 00:37 (16 जन॰) तक, फिर मीन

पंचांग के अंग — सूर्योदय से अगले सूर्योदय तक

वार
सोमवार
तिथि
शुक्ल पंचमी 02:17 (16 जन॰) तक, फिर शुक्ल षष्ठी 23:58 (16 जन॰) तक
नक्षत्र
शतभिषा 08:06 तक, फिर पूर्वभाद्रपदा 06:10 (16 जन॰) तक, फिर उत्तरभाद्रपदा 04:38 (17 जन॰) तक
योग
वरीयान 23:10 तक, फिर परिघ 20:00 (16 जन॰) तक
करण
बव 15:35 तक, फिर बालव 02:17 (16 जन॰) तक, फिर कौलव 13:04 (16 जन॰) तक

मुहूर्त-काल

  • अभिजित मुहूर्त12:21 – 13:06
  • राहु काल08:33 – 09:56
  • यमगंड11:20 – 12:43
  • गुलिक काल14:07 – 15:30

राहु काल, यमगंड और गुलिक परंपरा में नए शुभ कार्य के आरंभ के लिए टाले जाने वाले काल हैं — रोज़ के काम के लिए डरने का कारण नहीं।

चौघड़िया

दिन

  • अमृत(शुभ)07:09 – 08:33
  • काल(वर्जित (परंपरा))08:33 – 09:56
  • शुभ(शुभ)09:56 – 11:20
  • रोग(वर्जित (परंपरा))11:20 – 12:43
  • उद्वेग(वर्जित (परंपरा))12:43 – 14:07
  • चर(सामान्य)14:07 – 15:30
  • लाभ(शुभ)15:30 – 16:54
  • अमृत(शुभ)16:54 – 18:17

रात

  • चर(सामान्य)18:17 – 19:54
  • रोग(वर्जित (परंपरा))19:54 – 21:30
  • काल(वर्जित (परंपरा))21:30 – 23:07
  • लाभ(शुभ)23:07 – 00:43 (16 जन॰)
  • उद्वेग(वर्जित (परंपरा))00:43 (16 जन॰) – 02:20 (16 जन॰)
  • शुभ(शुभ)02:20 (16 जन॰) – 03:56 (16 जन॰)
  • अमृत(शुभ)03:56 (16 जन॰) – 05:33 (16 जन॰)
  • चर(सामान्य)05:33 (16 जन॰) – 07:09 (16 जन॰)

पुस्तक: पंचांग स्थान, सूर्योदय, समय-क्षेत्र और अयनांश पर निर्भर है — संस्कार, पर्व या मुहूर्त के लिए प्रकाशित स्थानीय पंचांग से समय सत्यापित करें।

निरयन लाहिड़ी अयनांश; सूर्योदय-सूर्यास्त सूर्य-बिंब के ऊपरी किनारे से, वायुमंडलीय अपवर्तन सहित। प्रकाशित पंचांगों से 1–2 मिनट का अंतर संभव।

पुस्तक में:विस्तार 4 · पंचांग, तिथि, योग और करण · पृष्ठ 61

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