पंचांग 19 मार्च 2026
तिथि और स्थान चुनें — सूर्योदय से अगले सूर्योदय तक तिथि, नक्षत्र, योग, करण, राहु काल और चौघड़िया। गणना आपके फ़ोन पर ही होती है।
स्थान
तिथि (तारीख)
19 मार्च 2026 · गुरुवार
पुणे — Pune, Maharashtra · समय इस स्थान के समय-क्षेत्र में (Asia/Kolkata)
इस महीने का पंचांग (कैलेंडर) सूर्योदय06:39
सूर्यास्त18:45
चंद्रोदयनहीं
चंद्रास्त19:08
- मास:
- फाल्गुन (अमांत) · चैत्र (पूर्णिमांत)
- संवत:
- शक 1947 · विक्रम (चैत्रादि) 2082
- संवत्सर:
- विश्वावसु (शक-आधारित, महाराष्ट्र/दक्षिण परंपरा)
- ऋतु · अयन:
- शिशिर · उत्तरायण
- सूर्य राशि:
- मीन
- चंद्र राशि:
- मीन
पंचांग के अंग — सूर्योदय से अगले सूर्योदय तक
- वार
- गुरुवार
- तिथि
- कृष्ण अमावस्या 06:53 तक, फिर शुक्ल प्रतिपदा 04:52 (20 मार्च) तक, फिर शुक्ल द्वितीया 02:31 (21 मार्च) तक
- नक्षत्र
- उत्तरभाद्रपदा 04:05 (20 मार्च) तक, फिर रेवती 02:28 (21 मार्च) तक
- योग
- शुक्ल 01:17 (20 मार्च) तक, फिर ब्रह्म 22:15 (20 मार्च) तक
- करण
- नाग 06:53 तक, फिर किंस्तुघ्न 17:56 तक, फिर बव 04:52 (20 मार्च) तक, फिर बालव 15:44 (20 मार्च) तक
मुहूर्त-काल
- अभिजित मुहूर्त12:18 – 13:06
- राहु काल14:13 – 15:43
- यमगंड06:39 – 08:10
- गुलिक काल09:41 – 11:11
राहु काल, यमगंड और गुलिक परंपरा में नए शुभ कार्य के आरंभ के लिए टाले जाने वाले काल हैं — रोज़ के काम के लिए डरने का कारण नहीं।
चौघड़िया
दिन
- शुभ(शुभ)06:39 – 08:10
- रोग(वर्जित (परंपरा))08:10 – 09:41
- उद्वेग(वर्जित (परंपरा))09:41 – 11:11
- चर(सामान्य)11:11 – 12:42
- लाभ(शुभ)12:42 – 14:13
- अमृत(शुभ)14:13 – 15:43
- काल(वर्जित (परंपरा))15:43 – 17:14
- शुभ(शुभ)17:14 – 18:45
रात
- अमृत(शुभ)18:45 – 20:14
- चर(सामान्य)20:14 – 21:43
- रोग(वर्जित (परंपरा))21:43 – 23:12
- काल(वर्जित (परंपरा))23:12 – 00:42 (20 मार्च)
- लाभ(शुभ)00:42 (20 मार्च) – 02:11 (20 मार्च)
- उद्वेग(वर्जित (परंपरा))02:11 (20 मार्च) – 03:40 (20 मार्च)
- शुभ(शुभ)03:40 (20 मार्च) – 05:09 (20 मार्च)
- अमृत(शुभ)05:09 (20 मार्च) – 06:38 (20 मार्च)
पुस्तक: पंचांग स्थान, सूर्योदय, समय-क्षेत्र और अयनांश पर निर्भर है — संस्कार, पर्व या मुहूर्त के लिए प्रकाशित स्थानीय पंचांग से समय सत्यापित करें।
निरयन लाहिड़ी अयनांश; सूर्योदय-सूर्यास्त सूर्य-बिंब के ऊपरी किनारे से, वायुमंडलीय अपवर्तन सहित। प्रकाशित पंचांगों से 1–2 मिनट का अंतर संभव।
पुस्तक में:विस्तार 4 · पंचांग, तिथि, योग और करण · पृष्ठ 61
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