पंचांग 20 मार्च 2026

तिथि और स्थान चुनें — सूर्योदय से अगले सूर्योदय तक तिथि, नक्षत्र, योग, करण, राहु काल और चौघड़िया। गणना आपके फ़ोन पर ही होती है।

स्थान
तिथि (तारीख)

20 मार्च 2026 · शुक्रवार

पुणे — Pune, Maharashtra · समय इस स्थान के समय-क्षेत्र में (Asia/Kolkata)

इस महीने का पंचांग (कैलेंडर)
सूर्योदय06:38
सूर्यास्त18:45
चंद्रोदय07:16
चंद्रास्त20:06
मास:
चैत्र (अमांत)
संवत:
शक 1948 · विक्रम (चैत्रादि) 2083
संवत्सर:
पराभव (शक-आधारित, महाराष्ट्र/दक्षिण परंपरा)
ऋतु · अयन:
वसंत · उत्तरायण
सूर्य राशि:
मीन
चंद्र राशि:
मीन 02:27 (21 मार्च) तक, फिर मेष

पंचांग के अंग — सूर्योदय से अगले सूर्योदय तक

वार
शुक्रवार
तिथि
शुक्ल द्वितीया 02:31 (21 मार्च) तक, फिर शुक्ल तृतीया 23:56 (21 मार्च) तक
नक्षत्र
रेवती 02:27 (21 मार्च) तक, फिर अश्विनी 00:37 (22 मार्च) तक
योग
ब्रह्म 22:15 तक, फिर इन्द्र 19:01 (21 मार्च) तक
करण
बालव 15:44 तक, फिर कौलव 02:31 (21 मार्च) तक, फिर तैतिल 13:15 (21 मार्च) तक

मुहूर्त-काल

  • अभिजित मुहूर्त12:17 – 13:06
  • राहु काल11:11 – 12:42
  • यमगंड15:43 – 17:14
  • गुलिक काल08:09 – 09:40

राहु काल, यमगंड और गुलिक परंपरा में नए शुभ कार्य के आरंभ के लिए टाले जाने वाले काल हैं — रोज़ के काम के लिए डरने का कारण नहीं।

चौघड़िया

दिन

  • चर(सामान्य)06:38 – 08:09
  • लाभ(शुभ)08:09 – 09:40
  • अमृत(शुभ)09:40 – 11:11
  • काल(वर्जित (परंपरा))11:11 – 12:42
  • शुभ(शुभ)12:42 – 14:13
  • रोग(वर्जित (परंपरा))14:13 – 15:43
  • उद्वेग(वर्जित (परंपरा))15:43 – 17:14
  • चर(सामान्य)17:14 – 18:45

रात

  • रोग(वर्जित (परंपरा))18:45 – 20:14
  • काल(वर्जित (परंपरा))20:14 – 21:43
  • लाभ(शुभ)21:43 – 23:12
  • उद्वेग(वर्जित (परंपरा))23:12 – 00:41 (21 मार्च)
  • शुभ(शुभ)00:41 (21 मार्च) – 02:10 (21 मार्च)
  • अमृत(शुभ)02:10 (21 मार्च) – 03:39 (21 मार्च)
  • चर(सामान्य)03:39 (21 मार्च) – 05:09 (21 मार्च)
  • रोग(वर्जित (परंपरा))05:09 (21 मार्च) – 06:38 (21 मार्च)

पुस्तक: पंचांग स्थान, सूर्योदय, समय-क्षेत्र और अयनांश पर निर्भर है — संस्कार, पर्व या मुहूर्त के लिए प्रकाशित स्थानीय पंचांग से समय सत्यापित करें।

निरयन लाहिड़ी अयनांश; सूर्योदय-सूर्यास्त सूर्य-बिंब के ऊपरी किनारे से, वायुमंडलीय अपवर्तन सहित। प्रकाशित पंचांगों से 1–2 मिनट का अंतर संभव।

पुस्तक में:विस्तार 4 · पंचांग, तिथि, योग और करण · पृष्ठ 61

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