पंचांग 26 दिसंबर 2026

तिथि और स्थान चुनें — सूर्योदय से अगले सूर्योदय तक तिथि, नक्षत्र, योग, करण, राहु काल और चौघड़िया। गणना आपके फ़ोन पर ही होती है।

स्थान
तिथि (तारीख)

26 दिसंबर 2026 · शनिवार

पुणे — Pune, Maharashtra · समय इस स्थान के समय-क्षेत्र में (Asia/Kolkata)

इस महीने का पंचांग (कैलेंडर)
सूर्योदय07:04
सूर्यास्त18:05
चंद्रोदय20:45
चंद्रास्त09:11
मास:
मार्गशीर्ष (अमांत) · पौष (पूर्णिमांत)
संवत:
शक 1948 · विक्रम (चैत्रादि) 2083
संवत्सर:
पराभव (शक-आधारित, महाराष्ट्र/दक्षिण परंपरा)
ऋतु · अयन:
हेमंत · दक्षिणायन
सूर्य राशि:
धनु
चंद्र राशि:
कर्क

पंचांग के अंग — सूर्योदय से अगले सूर्योदय तक

वार
शनिवार
तिथि
कृष्ण तृतीया 20:05 तक, फिर कृष्ण चतुर्थी 17:13 (27 दिस॰) तक
नक्षत्र
पुष्य 20:12 तक, फिर आश्लेषा 18:04 (27 दिस॰) तक
योग
वैधृति 00:22 (27 दिस॰) तक, फिर विष्कम्भ 20:53 (27 दिस॰) तक
करण
वणिज 09:42 तक, फिर विष्टि 20:05 तक, फिर बव 06:35 (27 दिस॰) तक, फिर बालव 17:13 (27 दिस॰) तक

मुहूर्त-काल

  • अभिजित मुहूर्त12:12 – 12:57
  • राहु काल09:49 – 11:12
  • यमगंड13:57 – 15:20
  • गुलिक काल07:04 – 08:26

राहु काल, यमगंड और गुलिक परंपरा में नए शुभ कार्य के आरंभ के लिए टाले जाने वाले काल हैं — रोज़ के काम के लिए डरने का कारण नहीं।

चौघड़िया

दिन

  • काल(वर्जित (परंपरा))07:04 – 08:26
  • शुभ(शुभ)08:26 – 09:49
  • रोग(वर्जित (परंपरा))09:49 – 11:12
  • उद्वेग(वर्जित (परंपरा))11:12 – 12:35
  • चर(सामान्य)12:35 – 13:57
  • लाभ(शुभ)13:57 – 15:20
  • अमृत(शुभ)15:20 – 16:43
  • काल(वर्जित (परंपरा))16:43 – 18:05

रात

  • लाभ(शुभ)18:05 – 19:43
  • उद्वेग(वर्जित (परंपरा))19:43 – 21:20
  • शुभ(शुभ)21:20 – 22:57
  • अमृत(शुभ)22:57 – 00:35 (27 दिस॰)
  • चर(सामान्य)00:35 (27 दिस॰) – 02:12 (27 दिस॰)
  • रोग(वर्जित (परंपरा))02:12 (27 दिस॰) – 03:49 (27 दिस॰)
  • काल(वर्जित (परंपरा))03:49 (27 दिस॰) – 05:27 (27 दिस॰)
  • लाभ(शुभ)05:27 (27 दिस॰) – 07:04 (27 दिस॰)

पुस्तक: पंचांग स्थान, सूर्योदय, समय-क्षेत्र और अयनांश पर निर्भर है — संस्कार, पर्व या मुहूर्त के लिए प्रकाशित स्थानीय पंचांग से समय सत्यापित करें।

निरयन लाहिड़ी अयनांश; सूर्योदय-सूर्यास्त सूर्य-बिंब के ऊपरी किनारे से, वायुमंडलीय अपवर्तन सहित। प्रकाशित पंचांगों से 1–2 मिनट का अंतर संभव।

पुस्तक में:विस्तार 4 · पंचांग, तिथि, योग और करण · पृष्ठ 61

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