पंचांग 14 जुलाई 2027
तिथि और स्थान चुनें — सूर्योदय से अगले सूर्योदय तक तिथि, नक्षत्र, योग, करण, राहु काल और चौघड़िया। गणना आपके फ़ोन पर ही होती है।
स्थान
तिथि (तारीख)
14 जुलाई 2027 · बुधवार
पुणे — Pune, Maharashtra · समय इस स्थान के समय-क्षेत्र में (Asia/Kolkata)
इस महीने का पंचांग (कैलेंडर) सूर्योदय06:05
सूर्यास्त19:14
चंद्रोदय15:52
चंद्रास्त02:59 (15 जुल॰)
- मास:
- आषाढ़ (अमांत)
- संवत:
- शक 1949 · विक्रम (चैत्रादि) 2084
- संवत्सर:
- प्लवंग (शक-आधारित, महाराष्ट्र/दक्षिण परंपरा)
- ऋतु · अयन:
- ग्रीष्म · उत्तरायण
- सूर्य राशि:
- मिथुन
- चंद्र राशि:
- वृश्चिक
पंचांग के अंग — सूर्योदय से अगले सूर्योदय तक
- वार
- बुधवार
- तिथि
- शुक्ल एकादशी 13:10 तक, फिर शुक्ल द्वादशी 14:41 (15 जुल॰) तक
- नक्षत्र
- अनुराधा 03:18 (15 जुल॰) तक, फिर ज्येष्ठा 05:39 (16 जुल॰) तक
- योग
- शुभ 12:49 तक, फिर शुक्ल 13:03 (15 जुल॰) तक
- करण
- विष्टि 13:10 तक, फिर बव 01:52 (15 जुल॰) तक, फिर बालव 14:41 (15 जुल॰) तक
मुहूर्त-काल
- अभिजित मुहूर्त12:14 – 13:06परंपरा में बुधवार को अभिजित नहीं लिया जाता
- राहु काल12:40 – 14:18
- यमगंड07:44 – 09:23
- गुलिक काल11:01 – 12:40
राहु काल, यमगंड और गुलिक परंपरा में नए शुभ कार्य के आरंभ के लिए टाले जाने वाले काल हैं — रोज़ के काम के लिए डरने का कारण नहीं।
चौघड़िया
दिन
- लाभ(शुभ)06:05 – 07:44
- अमृत(शुभ)07:44 – 09:23
- काल(वर्जित (परंपरा))09:23 – 11:01
- शुभ(शुभ)11:01 – 12:40
- रोग(वर्जित (परंपरा))12:40 – 14:18
- उद्वेग(वर्जित (परंपरा))14:18 – 15:57
- चर(सामान्य)15:57 – 17:36
- लाभ(शुभ)17:36 – 19:14
रात
- उद्वेग(वर्जित (परंपरा))19:14 – 20:36
- शुभ(शुभ)20:36 – 21:57
- अमृत(शुभ)21:57 – 23:19
- चर(सामान्य)23:19 – 00:40 (15 जुल॰)
- रोग(वर्जित (परंपरा))00:40 (15 जुल॰) – 02:01 (15 जुल॰)
- काल(वर्जित (परंपरा))02:01 (15 जुल॰) – 03:23 (15 जुल॰)
- लाभ(शुभ)03:23 (15 जुल॰) – 04:44 (15 जुल॰)
- उद्वेग(वर्जित (परंपरा))04:44 (15 जुल॰) – 06:06 (15 जुल॰)
पुस्तक: पंचांग स्थान, सूर्योदय, समय-क्षेत्र और अयनांश पर निर्भर है — संस्कार, पर्व या मुहूर्त के लिए प्रकाशित स्थानीय पंचांग से समय सत्यापित करें।
निरयन लाहिड़ी अयनांश; सूर्योदय-सूर्यास्त सूर्य-बिंब के ऊपरी किनारे से, वायुमंडलीय अपवर्तन सहित। प्रकाशित पंचांगों से 1–2 मिनट का अंतर संभव।
पुस्तक में:विस्तार 4 · पंचांग, तिथि, योग और करण · पृष्ठ 61
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